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यूपी: आठ साल पहले दिल्ली संग्रहालय आ गई थी लंदन से मूर्ति, मीडिया में सुर्खियां बनीं थीं वृष्णा योगिनी प्रतिमा, पढ़ें पूरी खबर

Sun, 12 Dec 2021 09:33 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

6 फरवरी 1982 को बांदा के लुखरी (अब चित्रकूट जिले में) के पहाड़ी पर स्थित मंदिर से वृष्णा योगिनी की पत्थर की प्राचीन मूर्ति चोरी हो गई थी। बाद में 1996 में इसे लंदन में देखा गया। मूर्ति किसी तरह मुंबई आ गई और वर्ष 2010 में एक एंटिक शॉप से इसे फ्रांस (पेरिस) में रहने वाले प्राचीन वस्तुओं के संग्रहकर्ता रोबर्ट ने खरीद लिया और पेरिस ले गया।
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दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में लंदन से लाई गई वृष्णा योगिनी प्रतिमा के साथ बुंदेलखंड विकास मंच के सचिव नसीर अहमद सिद्दीकी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बांदा के लुखरी (लोखारी) गांव से चोरी जिस मूर्ति को लंदन में होना बताया जा रहा है, वह लगभग आठ साल पहले 2013 में दिल्ली के नेशनल म्यूजियम (राष्ट्रीय संग्रहालय) ले आई जा चुकी थी। उस समय मीडिया में यह सुर्खियां बनी थी।
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लेकिन कुछ दिन बाद राष्ट्रीय संग्रहालय में इस मूर्ति को बस्ती (यूपी) के लोखरी गांव का बता दिया गया। इसे लेकर असमंजस की स्थिति है। उधर, लुखरी गांव अब चित्रकूट जिले में है। पहले यह बांदा में ही शामिल था। 

6 फरवरी 1982 को बांदा के लुखरी (अब चित्रकूट जिले में) के पहाड़ी पर स्थित मंदिर से वृष्णा योगिनी की पत्थर की प्राचीन मूर्ति चोरी हो गई थी। बाद में 1996 में इसे लंदन में देखा गया। मूर्ति किसी तरह मुंबई आ गई और वर्ष 2010 में एक एंटिक शॉप से इसे फ्रांस (पेरिस) में रहने वाले प्राचीन वस्तुओं के संग्रहकर्ता रोबर्ट ने खरीद लिया और पेरिस ले गया।
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कुछ संगठनों आदि की पैरवी से यह मूर्ति सितंबर 2013 में दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में ले लाई गई। वहां इस मूर्ति की फोटो और ब्योरा बांदा के मूल बाशिंदे और अखिल भारतीय बुंदेलखंड विकास मंच के राष्ट्रीय महासचिव नसीर अहमद सिद्दीकी ने मीडिया के समक्ष रखा।

तब यह खबर की सुर्खियां बनीं। बुंदेलखंड के कई लोगों ने दिल्ली के म्यूजियम में इसे देखा भी। म्यूजियम प्रशासन ने मूर्ति के नीचे लगाई पट्टिका में इसे बांदा के लुखरी गांव का होना लिखा था। कुछ दिन बाद ही राष्ट्रीय संग्रहालय में इस मूर्ति के नीचे दूसरी पट्टिका लगा दी है, इसमें मूर्ति का पूरा विवरण दर्ज है।

साथ ही इसे बस्ती (यूपी) के लुखरी गांव का बताया गया है। संग्रहालय के इस रद्दोबदल पर नसीर सिद्दीकी सहित कई बुंदेलखंडियों ने संग्रहालय प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराई हैं। 
 

राष्ट्रीय संग्रहालय में दर्ज विवरण
राष्ट्रीय संग्रहालय में मूर्ति पर लगाई गई पट्टिका में दर्ज विवरण  इस प्रकार है, योगिनी वृष्णा (भैंस के सिर वाली देवी)। 10-11 शताब्दी। ग्राम- लुखरी (यूपी)। ऊंचाई 132 सेमी। चौड़ाई 77 सेमी। गहराई 27 सेमी। बलुआ पत्थर। 

विदेशों के वापस आ चुकी हैं 13 प्राचीन मूर्तियां 
अखिल भारतीय बुंदेलखंड विकास मंच के राष्ट्रीय महासचिव नसीर अहमद सिद्दीकी (नई दिल्ली) बताते हैं कि नटराज से लेकर योगिनी वृष्णा योगिनी तक लगभग 13 प्राचीन मूर्तियां व वस्तुएं विदेशों से वापस भारत लाई जा चुकी हैं। इनमें सात संयुक्त राज्य अमेरिका से लाई गईं हैं। एक-एक फ्रांस और नीदरलैंड से प्राचीन वस्तु वापस लाई गई है। उन्होंने बताया कि राजकीय संग्रहालय दिल्ली में लाई गई प्रतिमा को बस्ती का बताए जाने पर संग्रहालय प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण महानिदेशक के समक्ष आपत्ति की गई है।
 
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लोखारी गांव के बुजुर्गों को भी याद आई मूर्ति चोरी  
बांदा के लुखरी गांव से 40 साल पहले चोरी हुई मूर्ति की खबर रविवार को अमर उजाला में छपने के बाद यहां यमुना किनारे बसे लोखारी गांव में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना है। ग्रामीणाें ने अखबार पढ़ा और गांव के बुजुर्गों से जानकारियां ली। 70 वर्षीय शिवचरण उर्फ चुनकवा महाराज ने अपने पूर्वजों के हवाले से बताया कि गांव के जमींदारों ने लगभग 200 वर्ष पहले यहां मंदिर बनवाया था।

इसमें महामाई की मूर्ति स्थापित थी। गांव के लोग पूजा करते थे। उन्होंने बताया कि वह कम उम्र के थे, तभी उन्होंने सुना था कि मंदिर से महामाई की मूर्ति चोरी हो गई। उधर, मंदिर में दफीना होने की अफवाह पर दफीनाबाजों ने जगह-जगह खुदाई कर डाली। इससे मंदिर खंडहर बन गया। 2015 में जयराम खेंगर ने उसी स्थान पर नया छोटा-सा मंदिर बना दिया है। इसमें पूजा पाठ हो रहा है। 
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