कानपुर में स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की नाकामी के कारण डेंगू से मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। बुधवार को एक फौजी, गर्भवती महिला सहित आठ और मरीजों की मौत हो गई। सरकारी और निजी अस्पतालों में डेंगू सहित विभिन्न तरह के बुखार के हजारों मरीज भर्ती हैं, इनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों के बेड फुल हैं। उधर, एडीएम और एसीएमओ ने बुधवार को हैलट इमरजेंसी पहुंचकर मरीजों से उनका हालचाल और अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कानपुर में डेंगू से अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है।
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डेंगू का कहर
- फोटो : अमर उजाला
पनकी स्वराज नगर सी-ब्लाक निवासी फौजी संदीप पाल (35) की दिल्ली में डेंगू के इलाज के दौरान मौत हो गई। पिता पूर्व फौजी राजेंद्र ने बताया कि आर्मी में हवलदार संदीप बीकानेर में तैनात था। वह दीपावली में छुट्टियां लेकर घर आया था, तभी उसे बुखार आने लगा। उसे डेंगू हो गया था। बकौल राजेंद्र उन्हें, पत्नी रामरती, संदीप के दोनों बेटों देवेश (6), अथर्व (4) को भी डेंगू हो गया था।
बाकी लोगों का यहां इलाज होता रहा, जबकि संदीप छुट्टियां खत्म होने की वजह से बीकानेर चला गया था। वहां हालत बिगड़ने पर संदीप को राजस्थान के सूरतगढ़ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से आर्मी बेस अस्पताल, दिल्ली शिफ्ट किया गया था। आर्मी अस्पताल से दिल्ली के ही आरआर हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया, जहां संदीप की मौत हो गई। उसका शव घर आने के बाद बिठूर घाट में अंतिम संस्कार किया गया।
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हैलट: कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया
पनकी कटरा गांव निवासी रामशंकर की गर्भवती पत्नी रिचा (27) आठ दिन से बुखार आ रहा था। सात माह की गर्भवती होने की वजह से परिजनों ने उसे पनकी के महावीर हॉस्पिटल में भर्ती कराया, वहां हालत बिगड़ने पर रिचा को 2 नवंबर को अपर इंडिया जच्चा - बच्चा अस्पताल रेफर कर दिया गया। रामशंकर ने बताया कि जच्चा - बच्चा अस्पताल के डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग से जांच कराई, जिसमें डेंगू की पुष्टि हुई।
3 नवंबर को उसे डेंगू के इलाज के लिए हैलट इमरजेंसी भेज दिया। इमरजेंसी से चंद घंटे बाद उसे हैलट के वार्ड 16 के बेड नंबर 29 पर शिफ्ट कर दिया गया। वार्ड में रात तक इलाज तो दूर, कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया। नर्सों से गुहार लगाने पर पता चला कि रविवार की वजह से डॉक्टर नहीं आए। हालत बिगड़ने के बावजूद इलाज न होते देख रिचा को फार्च्यून हॉस्पिटल, गीता नगर में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
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बच्चे, दो महिलाओं, छात्रा की गई जान
कल्याणपुर स्थित श्याम चिल्ड्रेन एंड मैटरनिटी सेंटर में डेंगू के इलाज के दौरान बुधवार सुबह शिवम (6) की मौत हो गई। ग्राम जोगापुरवा, बेबर (हरदोई) निवासी किसान रमेश अपनी पत्नी सिंदूरी के साथ 5 नवंबर को इस नर्सिंगहोम में इलाज के लिए बच्चे को लाया था। रमेश ने बताया कि निजी पैथोलॉजी में हुई जांच में शिवम के डेंगू पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी।
उधर, हैलट इमरजेंसी में रात में बुखार के इलाज के दौरान झाड़ी बाबा पड़ाव निवासी मधु (35) और छोटी जूही निवासी चंदा (35) की मौत हो गई। परिजनों ने निजी पैथालॉजी की जांच बताया कि निजी पैथोलॉजी में हुई जांच में डेंगू होने की पुष्टि हुई थी। किदवई नगर स्थित मर्सी मेमोरियल स्कूल की एक छात्रा की भी डेंगू से मौत हो गई है।
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शिक्षक ने दम तोड़ा
सरदार पटेल इंटर कालेज, जरौली फेज-2 के पूर्व शिक्षक वरुण विहार बर्रा-8 निवासी अरविंद यादव ने बुधवार रात मरियमपुर अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनको डेंगू हुआ था। मरियमपुर अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। मंगलवार से उनकी हालत बहुत बिगड़ गई थी।
शुक्लागंज में डेंगू ने एक और को निगला
शुक्लागंज के श्रीनगर मोहल्ले में रहने वाले अमरनाथ ने बताया कि उनकी पत्नी तारा शुक्ला (40) को तीन दिन से बुखार आ रहा था। उन्हें एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई। शुक्लागंज में डेंगू से अब तक छह मौतें हो चुकी हैं।
हम नहीं मानते प्राइवेट पैथोलॉजी लैबों की रिपोर्ट
प्राइवेट पैथोलॉजी वाले जिस किट से डेंगू की जांच कर रहे हैं और रिपोर्ट पॉजिटिव बता रहे हैं, हम उसे नहीं मानते। सिर्फ एनएस-1 जांच पॉजिटिव आने पर डेंगू की पुष्टि होती है। डेंगू से शहर में अभी तक एक ही मौत हुई है। हालांकि डेंगू पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1200 से ज्यादा हो चुकी है। - डॉ. अशोक शुक्ला, सीएमओ