30 से 40 फीसदी रोगी नहीं पहुंच पाते अस्पताल
न्यूरो साइंसेस विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि इस वक्त औसत 10 रोगी ब्रेन अटैक के आ रहे हैं। इनमें छह रोगियों के मस्तिष्क में खून का रिसाव हो रहा है और चार रोगियों के थक्का जमा रहता है। ब्रेन अटैक के 30 से 40 फीसदी रोगी अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं। उनकी घर में ही मौत हो जाती है।
अगर अटैक दूसरी बार पड़ा और खून का रिसाव हो गया, तो 60 फीसदी रोगियों की मौत घर या अस्पताल तक पहुंचने में हो जाती है। साल में ब्रेन अटैक के डेढ़ हजार रोगी आते हैं। अगर रोगी शुरुआती लक्षण उभरने पर आ जाएं, तो बिल्कुल ठीक हो सकते हैं। ब्रेन अटैक के दुष्प्रभाव नहीं रहेंगे।