तनिष्क की मौत के बाद परिजनों और मोहल्ले वालों की उग्रता देख डॉक्टर और स्टाफ भाग गया। ऑक्सीजन कम होने से आईसीयू में भर्ती तीन मरीजों की हालत गंभीर होने लगी।
सीएमओ डॉ. आरपी यादव को जानकारी मिली तो उन्होंने उर्सला के आईसीयू प्रभारी डॉ. सपन को भार्गव हॉस्पिटल भेजा। उन्होंने मरीजों के ऑक्सीजन लेवल को ठीक किया।
सिविल लाइंस की उजैफा (6) पुत्री शहनवाज समेत अन्य कई मरीजों को लेकर परिजन दूसरे अस्पतालों में चले गए थे। देर रात सीएमओ ने हॉस्पिटल में एंबुलेंस भी भेज दी थी।
जाति-सूचक गाली देने का भी आरोप
तिनष्क के परिजनों ने अस्पताल के डॉ. दया भार्गव, उनके बेटे-बहू, डॉ. सिराज हुसैन के खिलाफ जाति-सूचक गाली देने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने अस्पताल को सील कर मेडिकल स्टोर की जांच की मांग की है। इधर, हंगामे के दौरान तनिष्क की नानी के बेहोश होने से कोहराम मच गया। उनके होश में आने पर माहौल कुछ सामान्य हुआ।
प्रदेश में लागू है मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट
प्रदेश में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट लागू है। इसके तहत डॉक्टर, स्टाफ को मारना-पीटना या काम में बाधा पैदा करने पर अधिनियम की धारा तीन और चार के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें आरोपियों को कम से कम तीन साल की कारावास और 50 हजार तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। इसे गैर जमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है।