ओपीडी में त्वचा रोग विशेषज्ञ व अर्दली की खाली कुर्सी। (संवाद)
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कानपुर देहात। जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को अस्थि, त्वचा व बाल रोग विशेषज्ञ पौने बारह बजे तक ओपीडी नहीं पहुंचे। कक्ष के बाहर मरीज डॉक्टरों का इंतजार करने के बाद मायूस होकर लौट गए। जानकारी पाकर सीएमएस डॉ. आरए मिर्जा ने निरीक्षण किया, इस दौरान भी पूरी ओपीडी संचालित नहीं मिली।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोज सैकड़ों मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं ओपीडी से डॉक्टर नदारद रहने पर मरीजों को भटकना पड़ता है। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी के लिए 675 मरीजों ने पंजीकरण कराया। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी चलने का नियम है। इधर, सुबह से आए मरीजों को डॉक्टरों के आने के लिए घंटों फर्श पर बैठकर इंतजार करना पड़ा। इसमें में तीन विभागों के डॉक्टर पौने बारह बजे तक नहीं पहुंचे तो कई मरीज मायूस होकर लौट गए।
दुर्जनपुरवा के शिवम सिंह ने बताया कि बेटा बीमार है। वह सुबह ही अस्पताल आ गए थे। पर्चा बनवाकर ओपीडी के लिए पहुंचे लेकिन बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अमर चंद्रा कक्ष में नहीं मिले। काफी इंतजार के बाद करीब 12 बजे वह पहुंचे तक बच्चे को उन्हें दिखाया। वहीं, बन्ना जाखा की अनीता व मंगटा गांव की शशि ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष में न होने पर करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। माती की शिवकुमारी, सरगांव की फूल श्री व इकघरा के रामपाल और बन्ना जाखा के सियाराम ने बताया कि हड्डी रोग विशेषज्ञ पुष्कर आनंद को दिखाने के लिए सुबह ही अस्पताल आकर पर्चा बनवा लिया। लेकिन दोपहर 12 बजे तक डॉक्टर नहीं आए। वहीं, ओपीडी में त्वचा रोग विशेषज्ञ का कक्ष खुला जरूर था लेकिन वहां डॉ. अशोक जतारया और उनका अर्दली नदारद रहे। यहां मरीज पहुंचे लेकिन कक्ष में किसी के न होने पर लौट गए।
प्रभारी सीएमएस डॉ. आरए मिर्जा ने बताया कि सभी डॉक्टरों को समय से ओपीडी करने को कहा गया है।
रिपोर्ट में देरी पर फर्श पर लेट गए मरीज
कानपुर देहात। जिला अस्पताल की पैथालॉजी में जांचों में विलंब होता है। इसकी वजह से मरीजों को काफी परेशानी होती है। मंगलवार को पैथालॉजी में जांच के लिए खून का नमूना देने के बाद मरीज बाहर ही फर्श पर बैठ गए। इधर कई घंटे तक रिपोर्ट नहीं मिली तो कुछ मरीज फर्श पर ही लेट गए।