कानपुर। दहेज उत्पीड़न के मामले में विवेेचक ने तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट एसीपी कार्यालय भेजी लेकिन एसीपी ने दूसरे विवेचक को जांच सौंपकर अग्रिम विवेचना के आदेश कर दिए। सिर्फ पति के खिलाफ कोर्ट में दाखिल हुई चार्जशीट पर पीड़िता के अधिवक्ता ने आपत्ति जताई तो कोर्ट ने तथ्यों को देखने के बाद पति, सास-ससुर व ममिया ससुर को भी आरोपी मानकर 31 जुलाई को तलब कर लिया है। साथ ही स्वरूपनगर एसीपी रहे आईपीएस सुमित रामटेके के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी की है।
काकादेव थाना क्षेत्र के गीतानगर निवासी निकिता जायसवाल का विवाह 16 नवंबर 2024 को दिल्ली में आयुष गुप्ता से हुआ था। निकिता गुरुग्राम में साफ्टवेयर इंजीनियर थी। निकिता ने दहेज उत्पीड़न का आरोप लगाया था। कानपुर आकर निकिता ने 21 सितंबर 2025 को काकादेव थाने में पति आयुष गुप्ता, सास अलका, ससुर दीपक, ननद व ममिया ससुर अश्वनी शर्मा के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट आदि धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। निकिता के अधिवक्ता ने बताया कि मामले में विवेचक ने पति, सास, ससुर के खिलाफ चार्जशीट एसीपी स्वरूपनगर को भेजी थी लेकिन एसीपी ने दूसरे विवेचक को जांच सौंपते हुए अग्रिम विवेचना के आदेश दे दिए। दूसरे विवेचक ने सिर्फ पति के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में दाखिल कर दी। निकिता को कोर्ट का समन मिलने पर अधिवक्ता ने चार्जशीट के खिलाफ आपत्ति दाखिल की। दूसरे विवेचक द्वारा गलत तरीके से आरोपियों के नाम हटाने की बात कही गई। सभी तथ्यों को देखने के बाद कोर्ट ने पति, सास, ससुर व ममिया ससुर को समन भेजकर तलब कर लिया है। साथ ही तत्कालीन स्वरूप नगर एसीपी आईपीएस सुमित रामटेके के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर रिपोर्ट देने के लिए डीजीपी व प्रमुख सचिव गृह को आदेश की प्रति भी भेजी गई है।