बर्रा के दरोगा गेस्ट हाउस से मिले 25 बीडीसी सदस्यों के मामले में भले ही पुलिस ने बर्फ लगाने की कोशिश की हो लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा गरम है।
एक-एक वोट की खातिर जिस तरह की ‘प्लानिंग की गई थी उससे साफ है कि लोकतंत्र के बाजार में हो रही नेताजी की ‘नीलामी’ में करोड़ों का खेल चल रहा है। गांव की ‘सरकार’ की जड़ में ही नोटों की िमट्टी बिछाई जा रही है। तभी बंधक बताए गए सभी बीडीसी ने चुप्पी साध ली!
बर्रा पांच स्थित दरोगा गेस्ट हाउस में बुधवार देर रात मिले 25 बीडीसी सदस्यों के मामले में पैसा, पॉवर, पुलिस और पालिटिक्स की डर्टी पिक्चर दिखाई दी। पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। सभी सदस्यों को बिधनू थाने में लिखापढ़ी के बाद घर वालों के सुपुर्द कर दिया गया।
थानाध्यक्ष आरएल पांडे कहते हैं कि किसी भी बीडीसी सदस्य ने कोई शिकायत नहीं की, इसलिए लिखापढ़ी नहीं की गई लेकिन कानून के जानकारों की मानें तो ऐसी स्थिति में पुलिस भी अपनी ओर से मुकदमा दर्ज कर सकती है। दूसरी ओर एक बीडीसी सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन लोगों को दीपावली पर टोकन मनी के रूप में 50-50 हजार रुपये और एक-एक मोबाइल दिया गया था।
इसके एवज में उनके सर्टिफिकेट जमा करा लिए गए थे। वे लोग गुरुवार और शुक्रवार को शहर छोड़ने वाले थे। इन सभी को तीर्थ यात्रा पर निकल जाना था। इसके बाद ये सीधे 7 फरवरी को वोट डालने ही शहर आते।
पुलिस को बुधवार देर रात गेस्ट हाउस में बीडीसी सदस्यों के बंधक होने की सूचना मिली थी। इस पर गोविंदनगर और बाबूपुरवा सर्किल की फोर्स मौके पर पहुंची तो कमरों में बड़ी संख्या में बीडीसी मिले। सभी बिधनू ब्लाक के थे, लिहाजा सीओ गोविंदनगर ने सभी को बिधनू थाने भिजवा दिया था।
पुलिस का कहना है कि गेस्ट हाउस में कुल 41 लोग थे, जिनमें नौ महिला बीडीसी समेत 25 बीडीसी थे। महिलाएं तो अपने बच्चों को भी लेकर पहुंची थीं। इस मामले में निवर्तमान बिधनू ब्लाक के प्रमुख रमेश यादव पर बीडीसी सदस्यों को लाने के आरोप लगे थे।
टोकन मनी पर गिरवी रखे जाते हैं सर्टिफिकेट
क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) के नतीजे आने के बाद ही ब्लाक प्रमुख पद के दावेदारों का जोड़तोड़ का ख\ेल शुरू हो जाता है। सूत्रों की मानें तो बीडीसी सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए दावेदार चुनाव से पहले ही टोकन मनी देकर उनके प्रमाणपत्र जमा करवा लेते हैं। वोट डालने के बाद बाकी की रकम और सर्टिफिकेट लौटा दिए जाते हैं।
रमेश ने दी सफाई
निवर्तमान बिधनू ब्लाक प्रमुख रमेश यादव का कहना है कि गेस्ट हाउस में मिले बीडीसी सदस्यों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उनकी छवि बिगाड़ने की साजिश है यह। वहीं कुछ बीडीसी सदस्यों और ग्राम प्रधानों ने चुनाव आयोग को फैक्स भेजकर पुलिस की मदद से सत्ता पक्ष के लोगों पर दबाव बनवाने का आरोप लगाकर शिकायत की है।
आयोग से बिधनू एसओ की शिकायत
कुछ बीडीसी सदस्यों ने बिधनू थानाध्यक्ष आरएल पांडेय पर ब्लाक प्रमुख चुनाव में सपा के पक्ष में वोटिंग न करने पर फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाकर राज्य निर्वाचन आयुक्त से शिकायत की है। बसपा समर्थित बीडीसी सदस्य राम प्रसाद निवासी इनायतपुर, अवधेश कुमार निवासी कठारा, रीना निवासी गुसाईंपुरवा, अशोक कुमार निवासी अफजलपुर, शोभा निवासी कठुई, अमरलाल निवासी बगाहा, जगनीत निवासी पिपौरी, अनूप सिंह निवासी दहेली उजागर ने निष्पक्ष चुनाव के लिए एसओ को हटाने की मांग भी उठाई है।
25 बीडीसी सदस्यों की सूची
महेश और भूरा शंभुआ, रामवरन पिपरगवां फर्स्ट, रामप्रसाद कासिमपुरवा, विजय सिंह सेन पश्चिम पारा, विश्राम बाजपुर, जगजीत पिपौरी, विजय हरदौली, गुलाब भैरमपुर, अमर सिंह बगाहा, अशोक सिंह अफजलपुर, अनुज सिंह जरकला, अवधेश कुमार कठारा सेकेंड, शिवपाल भैरमपुर, अनूप भदौरिया दहेली, राहुल भदौरिया सपई, राज बहादुर कुठहार, रीना पाल गुजाइनपुरवा, सुमन न्योरी, सवित्री कठारा थर्ड, वंदना रौतारा, ममता खिरसा, बिट्टन करौली, सजनी बिधनू, रेखा देवी कुरियाखेड़ा।
विकास की मंशा थी स्थापना
ग्राम पंचायती राज की स्थापना सत्ता का विकेंद्रीकरण रोकने के लिए की गई थी। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी पंचायत एवं नगरीय निकाय वीके श्रीवास्तव ने बताया कि एक जगह सत्ता को केंद्रित होने से रोकने के प्रयास के लिए गांव, ब्लाक और जिला पंचायत का गठन किया गया था। इसका मकसद था कि इन सभी स्थानों पर विकास के लिए अलग से प्रतिनिधि रहें ताकि भेदभाव न हो सके।
मेजबानों को छोड़ दिया
बीडीसी सदस्यों के गेस्ट हाउस में मिलने के मामले में बिधनू पुलिस भी खेल कर गई। जिन चार लोगों ज्ञानसिंह, पप्पू, राम नरेश, अंकित ने पुलिस को बताया था कि वे लोग बसपा नेता के कहने पर बीडीसी सदस्यों को यहां लेकर आए थे, पुलिस ने उन चारों को भी परिजनों के सुपुर्द कर दिया। यह भी पता लगाने का प्रयास नहीं किया कि आखिर सदस्यों को लाया क्यों गया था। पुलिस ने मौके से मिली एक बोलेरो को जरूर सीज किया है।
नेता बिकते हैं बोलो खरीदोगे
बर्रा के दरोगा गेस्ट हाउस से बुधवार आधी रात के बाद 25 बीडीसी सदस्यों के मिलने से एक बात साफ है कि लोकतंत्र के बाजार में नेताजी ‘नीलाम’ हो रहे हैं। दस ब्लाकों के प्रमुख बनने के लिए 787 बीडीसी सदस्यों के धड़ल्ले से दाम लगाए जा रहे हैं। यूं तो प्रति बीडीसी सदस्य 10 से 25 लाख रुपये की बोली लगाई जा रही है।
एक बीडीसी का अगर दस लाख रुपये भी मान लिया जाए तो दस ब्लाक प्रमुख बनने के लिए कम से कम 7.87 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है। इस भ्रष्टाचार रोकने के लिए ही महापौर की तरह ब्लाक प्रमुख चुनने का अधिकार भी पब्लिक को देने की मांग उठी है।