बिजली विभाग के अफसर और कर्मचारियों की मनमानी से उपभोक्ता परेशान होते हैं। समस्या लिए उपभोक्ता केस्को से लेकर बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। विद्युत लोकपाल की अदालत में इस बात का खुलासा हुआ कि 80 फीसदी मामलों में वे निर्दोष साबित होते हैं और बिजली विभाग दोषी।
विद्युत व्यथा निवारण फोरम और विद्युत लोकपाल की अदालतों में अधिकांश फैसले उपभोक्ताओं के पक्ष में ही होते हैं। बुधवार को विद्युत लोकपाल आरएस पांडेय ने केस्को मुख्यालय में अदालत लगाई और छह मामलों में फैसला सुनाया। इनमें से पांच निर्णय उपभोक्ताओं के पक्ष में गए।
वर्ष 2015-16 में केस्को फोरम के कुल 182 मामले आए। 64 में फैसला आया और इनमें 51 उपभोक्ताओं के पक्ष में हैं। इसी तरह कानपुर जोन (हाइडिल क्षेत्र) में कुल 29 मामलों में 16 में से 14 फैसले उपभोक्ताओं के पक्ष में हुए।
हाइडिल निकला बकायेदार
पांडु नगर की संगीता अग्रवाल पर हाइडिल ने 1,25,074 रुपये का बिल बनाया। हाइडिल ने बिल ग्रामीण बिजली की दर के बजाय शहरी क्षेत्र के हिसाब से वसूला। मामला फोरम पहुंचा फिर विद्युत लोकपाल ने फैसला दिया। उपभोक्ता का बिल ग्रामीण दर के हिसाब से रिवाइज हुआ। हाइडिल पर ही 53 हजार रुपये की बकाएदारी निकाल दी।
मीटर का शुल्क भी नहीं दिया
गोविंद नगर के विनीत चंद्रा का बल्क कॉमर्शियल कनेक्शन था। उन्होंने कनेक्शन खत्म किया और हाइडिल मीटर और क्यूबिक बॉक्स निकाल ले गया। बावजूद इसके मीटर का शुल्क वापस नहीं कर रहा था। विद्युत लोकपाल ने 28,700 रुपये उपभोक्ता को वापस करने का फैसला सुनाया है।
कॉमर्शियल बिल वसूला
सिविल लाइंस के राधेलाल खंडेलवाल का रेडीमेड गारमेंट का कारखाना था। उन्होंने कारखाना बंद कर पावरलूम लगा लिया। इस पर सरकार सब्सिडी कनेक्शन देती है लेकिन केस्को राधेलाल को छूट नहीं दे रहा था। लोकपाल की अदालत ने 5 फरवरी तक नया सब्सिडी का कनेक्शन देकर उसी दर से बिल लेने का फैसला सुनाया है।