मलबा हटाकर दोनों को हैलट अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर से परिवार में कोहराम मच गया। एसीपी बाबूपुरवा संतोष कुमार सिंह ने बताया कि दीवार काफी पुरानी और जर्जर थी।सोमवार को हुई बरसात से दीवार और कमजोर हो गई थी।
किस्मत से बच गईं तीन अन्य जानें
कृष्णा देवी लोगों के घरों में चौका बर्तन करती थीं। पति की पूर्व में ही मौत हो चुकी है। वह अपने तीन बेटों नगीना, पंकज, सबनाम, बेटी दीपा, दामाद सुरेश व उनके तीन बच्चों आर्यन (12), शैलेंद्र (10) व कुनाल के साथ रहती थीं।हादसे के वक्त तीनों बेटे और दामाद काम पर गए थे।
दीपा अपने तीनों बच्चों के साथ हादसे के कुछ देर पहले इसी दीवार के पास ही मौजूद थी। लोगों ने बताया कि दीपा, आर्यन व शैलेंद्र के साथ जैसे ही घर के अंदर गई, तभी हादसा हो गया। लोगों में किस्मत से तीनों की जान बच जाने की चर्चा रही।