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Kanpur News: चिड़ियाघर में रैबीज संक्रमण से हुई थी ढोल के शावकों की मौत

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कानपुर। चिड़ियाघर में पांच माह पहले जन्मे जंगली कुत्तों (ढोल) के तीन शावकों की मई और जून में मौत रैबीज संक्रमण से हुई थी। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट सामने आने के बाद चिड़ियाघर में हड़कंप मच गया है। डॉक्टरों और कीपरों ने एहतियात के तौर पर एंटी-रैबीज टीके लगवाने शुरू कर दिए हैं।
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2025 में विशाखापट्टनम से लाए गए जंगली कुत्तों के जोड़े ने जनवरी में तीन शावकों को जन्म दिया था जिनमें एक मादा और दो नर शामिल थे। जन्म के समय सभी शावक पूरी तरह स्वस्थ थे और उनकी देखभाल के लिए विशेष चिकित्सकीय टीम तैनात की गई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ शावकों ने भोजन कम करना शुरू कर दिया। इसे सामान्य स्वास्थ्य समस्या मानकर उपचार शुरू किया गया लेकिन स्थिति बिगड़ती चली गई और मई व जून में तीनों शावकों की मौत हो गई।

मृत्यु का कारण स्पष्ट न होने पर विसरा जांच के लिए आईवीआरआई भेजा गया था। अब रिपोर्ट में रैबीज की पुष्टि के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि संरक्षित चिड़ियाघर परिसर में संक्रमण पहुंचा कैसे। यदि जानवरों के नियमित टीकाकरण और निगरानी की व्यवस्था थी तो तीन शावक इस घातक बीमारी की चपेट में कैसे आए। इस घटना ने चिड़ियाघर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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रिपोर्ट के बाद कर्मचारियों और चिकित्सकीय स्टाफ में चिंता बढ़ गई है। शावकों के संपर्क में आए कई कर्मचारियों ने एहतियातन एंटी-रैबीज वैक्सीन लगवाई है। प्रशासन अब संक्रमण के संभावित स्रोत की जांच में जुटा है। चिड़ियाघर के डॉक्टर नासिर ने बताया कि बारी-बारी से शावकों की मौत हुई थी। आईवीआरआई से आई रिपोर्ट में रैबीज की पुष्टि हुई है। अब अन्य जानवरों की जांच कराई जाएगी।
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