इसके अलावा प्रारंभिक जांच में यह भी पाया गया था कि अर्पित सिंह जो कि दिव्यांग श्रेणी में चयनित हुआ था। उसके पास आवश्यक प्रमाण पत्र फार्म भरे जाते समय नहीं थे। इसी अभ्यर्थी के 58 अंक 69 कर दिए गए थे। इसी तरह विवेक चंद्रा, आरती गुप्ता, प्रतिभा मिश्रा और उत्कर्ष श्रीवास्तव के भी नंबरों को डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने बढ़ाए थे। चयनित अभ्यर्थी रविकांत पांडेय को 75 अंक मिले थे।
उत्तरों में ओवरराइटिंग भी मिली थी
उत्तर पुस्तिका में तीन प्रश्नों के उत्तर में ओवरराइटिंग थी। उत्कर्ष श्रीवास्तव को 76 अंक मिले थे। चार उत्तरों में ओवरराइटिंग थी। चारों में अंक भी दिए गए थे। आरती गुप्ता को लिखित परीक्षा में 70 अंक मिले थे। तीन उत्तरों में ओवरराइटिंग थी। इसके अलावा प्रतिभा मिश्रा को 75 अंक मिले थे। उसके दो उत्तरों में ओवरराइटिंग थी, लेकिन उसे भी दो नंबर दिए गए। अर्पित सिंह को 69 अंक मिले और पांच उत्तरों में ओवरराइटिंग थी।
सफेद स्याही का इस्तेमाल किया गया था
उसके नंबर भी कम न करके बढ़ा दिए गए। विवेक चंद्रा को 69 अंक मिले और उसके चार उत्तरों में ओवरराइटिंग थी। उसे भी चार अंक दिए गए। हालांकि उसने चयन होने के बाद भी नौकरी नहीं की थी। सूत्रों ने बताया कि नंबरों को घटाने और बढ़ाने में सफेद स्याही का इस्तेमाल किया गया था। अब स्याही की फोरेसिंक जांच कराई जा रही है। स्याही किस स्थान से ली गई। इसका किसने, कितनी बार और किन-किन उत्तर पुस्तिकाओं में इस्तेमाल किया, इसकी जांच की जा रही है।
विभाग हाईकोर्ट में दाखिल करेगा याचिका
सूत्रों ने बताया कि कुछ दिनों पहले बर्खास्त हुए पांचों आरोपी क्लर्क फिर से स्टे ले आए हैं। बुधवार से नौकरी भी शुरू कर दी है। 15 मार्च को विभाग ने स्टे खारिज होने के बाद दोबारा बर्खास्त कर दिया था। सूत्रों के अनुसार विभाग ने स्टे के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सीबीआई ने 2020 में दर्ज किया था मामला
सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक राम सिंह ने शिकायत और जांच के बाद 22 दिसंबर 2020 को परीक्षा ऑफिसर्स बोर्ड के चेयरमैन डाॅ. संतोष तिवारी के अलावा कैंट निवासी रविकांत पांडेय, फैजाबाद निवासी उत्कर्ष श्रीवास्तव, केडीए कॉलोनी निवासी आरती गुप्ता, श्यामनगर निवासी प्रतिभा मिश्रा, आरकेनगर निवासी अर्पित सिंह और अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इस मामले में 9 दिसंबर 2021 को आरएन सिरोटिया, निरीक्षक सीबीआई एसीबी, लखनऊ ने क्लोजर रिपोर्ट दस्तावेज के साथ पेश किए गए थे। न्यायालय ने 10 फरवरी 2023 को बिंदुवार आदेश में क्लोजर रिपोर्ट सवाल खड़े करके उसे वापस करके नए सिरे से जांच के आदेश दिए थे।