आरटीआई में हुआ था खुलासा
आंतरिक जांच के बाद 28 नवंबर 2017 को तीन और आठ दिसंबर 2017 को दो आरोपियों को हटा दिया गया था। इसके बाद पांचों आरोपी तथ्य छिपाकर कैट से जनवरी 2018 में स्टे ले आए थे। यह केवल 28 जुलाई 2021 तक ही वैध था। इसके बाद भी आरोपी नौकरी करते रहे। इसका खुलासा आरटीआई में हुआ था। इसकी एक कॉपी जब कैट भेजी गई तो वहां से विभाग को कार्रवाई का आदेश दिया गया। इसके बाद 15 मार्च को पांचों को बर्खास्त किया गया।
इन्होंने पाई थी फर्जी तरीके से नौकरी
कैंट निवासी रविकांत पांडेय, केडीए कॉलोनी निवासी आरती गुप्ता, श्यामनगर निवासी प्रतिभा मिश्रा, आरकेनगर निवासी अर्पित सिंह, फैजाबाद निवासी उत्कर्ष श्रीवास्तव।
सीबीआई ने भर्ती बोर्ड के चेयरमैन और आरोपियों पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट
सीबीआई के अपर पुलिस अधीक्षक राम सिंह ने शिकायत की जांच के बाद 22 दिसंबर 2020 को परीक्षा भर्ती बोर्ड के चेयरमैन डाॅ. संतोष तिवारी के अलावा पांचों आरोपियों और अज्ञात के खिलाफ साजिश रचने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, धोखाधड़ी करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नौ दिसंबर 2021 को सीबीआई एसीबी, लखनऊ ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
चेयरमैन को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले दी गई थी चार्जशीट
सीबीआई लखनऊ कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए सवाल खड़े किए थे। उच्च अफसर से जांच के निर्देश के बाद रक्षा मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए भर्ती बोर्ड के चेयरमैन डॉ. संतोष तिवारी और दो सदस्यों अलीम अंसारी और सुनील कुमार के खिलाफ चार्जशीट दी थी। खास बात यह थी कि चेयरमैन को सेवानिवृत्ति (28 फरवरी 2023) से ठीक एक दिन पहले चार्जशीट दी गई थी।