ढाई साल से अटका हुआ है संचालन
साल दर साल बीते जा रहे हैं। यहां जरूरी चिकित्सक व स्टाफ से लेकर उपकरण न होने के चलते पिछले ढाई साल से संचालन अटका हुआ है। जिले के स्वास्थ्य अधिकारी मामले में कागजी कवायद से लेकर चार चिकित्सकों की तैनाती का हवाला देकर जल्द संचालन की उम्मीद बढ़ा देते हैं।
सैफई व कानपुर रेफर करने की है परंपरा
हालांकि, इस सब के बावजूद ट्रामा सेंटर पर झाड़ियों के बीच पसरा सन्नाटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सड़क पर हो रहे हादसों में गंभीर घायल मरीजों को सैफई व कानपुर हायर सेंटर रेफर करने की परंपरा लगातार चलती जा रही है।
कागजों तक ही सीमित हैं चिकित्सक
जिले में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के उपचार को लेकर ट्रामा सेंटर के संचालन की फिलहाल कोई ठोस प्रयास जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं। यहां तैनात किए गए चिकित्सक कागजों तक ही सीमित हैं। हालांकि शासन स्तर से पिछले दिनों ट्रामा सेंटर के लिए 50 पदों के सृजन की स्वीकृति दे दी गई है।
शासन स्तर से दो दिन बाद संवाद किया जाना है, जिसमें ट्रामा सेंटर के संचालन को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। शासन से स्वीकृत 50 पदों में तैनात किए गए चार चिकित्सकों को भी शामिल रखा गया है। -डॉ. सुनील कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी