लेकिन, संघर्ष के साथ सच्चाई की लड़ाई सबकुछ सहकर लड़ती रही। इसमें बेटों के साथ परिवार की बेटियों ने भरपूर साथ दिया। विधायक के परिवार ने इस प्लॉट से बेघर करने के लिए कोई हथकंडा नहीं छोड़ा गया। कहा कि उनकी लड़ाई में पुलिस प्रशासन और मीडिया ने भरपूर साथ दिया है। कहा कि कि कोर्ट ने सच के लिए लड़ रहे एक गरीब, कमजोर परिवार के हक में फैसला दिया है।
अल्लाह की लाठी में आवाज नहीं होती
नजीर ने बताया कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से फरियाद की, तो न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई। इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। इससे बेहद कम समय में दोषियों को सजा मिली। नजीर ने कहा कि अल्लाह की लाठी में आवाज नहीं होती। जो जैसा करता है उसे वैसा ही भरना पड़ता है। कहा कि जो सजा मिली है , वो हमारे साथ हुए अन्य से बहुत कम है। उन्होंने पुलिस से जान का खतरा जता सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
दहशत की वजह से नहीं गईं कोर्ट
नजीर ने कहा कि पहले उनका मन था कि कोर्ट जाकर सजा को सुनें लेकिन उनको, बेटी कनीज जेहरा और बेटे शमसुद्दीन को डर था कि फैसला आने के बाद उनके साथ कोई अनहोनी न हो जाए। इसलिए वह कोर्ट नहीं गईं। बताया कि उनकी अधिवक्ता ने फोन कर आरोपियों को 7 साल की सजा होने की जानकारी मिली जिसे सुनकर खुशी के मारे आंसू निकल पड़े। इसके बाद नमाज अदा कर अल्लाह का शुक्रिया अदा किया।
समझौते के लिए मिली धमकी, रिश्तेदारों से भी बुराई
नजीर ने बताया कि मामले में चल रहे विवाद के बीच कई बार विधायक और उसके भाई की ओर से समझौता का प्रस्ताव आया। इस पर हमारी ओर से इनकार किया गया तो कई रिश्तेदारों को भी उन्होंने अपने पक्ष में लेकर समझौते का दबाव बनाया। लेकिन हम हक की लड़ाई के लिए अड़े रहे। परिवार को जान से मारने की धमकियां मिली। कई रिश्तेदारों से भी संबंध बिगड़ गए।
परिवार को जान का खतरा, बढ़ाई जाए सुरक्षा
फैसला आने के बाद परिवार ने जान को खतरे की आशंका जताई है। कोर्ट के फैसले से बौखलाहट में परिवार पर जानलेवा हमला भी हो सकता है। इसलिए उन्होंने मांग की है कि पुलिस फोर्स बढ़ाया जाए । साथ ही आने जाने वालों पर निगरानी भी रखी जाए।
प्लॉट के विवाद में बर्बाद हुआ परिवार, बच्चों को न मिल सकी तालीम
नजीर फातिमा ने बताया कि उनके पति का कोहिनूर ट्रांसपोर्ट के नाम से बड़ा व्यापार था। इरफान के पिता व परिवार की बहुत मदद की। लेकिन बच्चे गद्दार निकले। सत्ता के नशे में चूर सोलंकी बंधुओं ने हमें ही बेघर करना शुरू कर दिया। बताया कि इसी प्लॉट की लड़ाई में उनकी गाड़ियां खड़े-खड़े जंग खाकर कंडम हो गई। दो को मारा पीटा गया। फर्जी मुकदमे दर्ज हुए। इससे उनकी मौत हो गई। साथ ही पति ने भी साथ छोड़ दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ गई। रोजी-रोटी का संकट आ गया। फिर कभी बुलडोजर तो कभी पुलिस के जरिये यातनाएं दी।