कमर तोड़ रही महंगाई ने त्योहारों की रंगत भी फीकी कर दी है। रावण के पुतलों पर भी महंगाई की मार है। बांस, अखबारी और रंगीन कागज के दामों में 20 से 25 प्रतिशत उछाल आने से रावण के पुतलों के भी भाव बढ़ गए हैं। इसके अलावा पुतलों की मांग बढ़ने से भी खासकर छोटे पुतले महंगे बिक रहे हैं। मांग इसलिए बढ़ी, क्योंकि कोरोना के चलते बहुत से लोग भीड़भाड़ में नहीं जाना चाहते।
इसके चलते लोगों ने छोटे-छोटे पुतले लेकर मोहल्ले में ही उनका दहन करना मुनासिब समझा है। शहर में जीटी रोड, पराग डेयरी के पास लगे पुतलों की बिक्री ज्यादा होती है। कारीगरों ने करीब दो हजार से ज्यादा छोटे-बड़े पुतले बनाए हैं। मांग के अनुरूप छोटे साइज के पुतले अधिक हैं। कारीगर रमेश कुमार बताते हैं कि दशहरा वाले दिन ही पुतलों की बिक्री ज्यादा होती है। क्योंकि इन्हें संभालकर रखना मुसीबत भरा काम है। रमेश ने बताया कि पुतलों को बनाने में इस्तेमाल आने वाला कच्चा माल महंगा हो गया है।
पहले जो अखबारी कागज 7-8 रुपये किलो में मिल जाता था। अब वह 12-13 रुपये किलो में मिल रहा है। रंगीन कागज भी पांच रुपये किलो तक महंगा हो गया है। डीजल के रेट बढ़ने से माल-भाड़ा अधिक हो गया है। वहीं लाजपत नगर दशहरा कमेटी के प्रबंधक कपिल सब्बरवाल और अध्यक्ष विक्रम पांडेय ने बताया कि कमेटी ने इस बार 45 फीट का पुतला बनवाया है। यह करीब 60 हजार रुपये में तैयार हुआ है। पिछले साल इतने ही रुपये में 70 फीट का पुतला बन गया था।