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26 माह बाद लौट के दद्दू बसपा में आए

Fri, 07 Apr 2017 11:23 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

दिल्ली में मायावती ने किया शामिल, बसपा के संस्थापक सदस्यों में रहे 
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विस्तार
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विधान सभा चुनाव में पराजय के लगे तगड़े झटके के बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने पुराने दिग्गजों को पार्टी में फिर वापस लाने की कवायद शुरू कर दी हैं। शुरूआत पूर्व मंत्री और बसपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे दद्दू प्रसाद और पूर्व सांसद ईशम सिंह से हुई है। 
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बांदा के रहने वाले दद्दू प्रसाद बसपा के संस्थापक सदस्य माने जाते हैं। वह 1983 से डीएस-4 में कांशीराम के समय से जुड़े रहे हैं। बसपा ने उनको हमेशा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं। मानिकपुर (सुरक्षित) सीट से चार बार चुनाव लड़ाया। जिसमें तीन बार जीते। वर्ष 2007 से वर्ष 2012 तक बसपा सरकार में काबीना मंत्री रहे। उत्तर प्रदेश के कई मंडलों समेत दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल, मध्य प्रदेश आदि के बसपा कोआर्डिनेटर रहे। 
दद्दू प्रसाद को बसपा मुखिया मायावती ने 28 जनवरी 2015 को पार्टी से निकाल बाहर किया था। उन पर अनुशासनहीनता आदि के आरोप थे।
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दद्दू प्रसाद। 
निष्कासन के बाद दद्दू ने बहुजन मुक्ति पार्टी गठित की और उसके अध्यक्ष बन गए। बसपा नेतृत्व को कई बार खरीखोटी भी सुनाई। हाल ही में हुए विधान सभा चुनाव में वह अपनी बहुजन मुक्ति पार्टी से मानिकपुर (चित्रकूट) से चुनाव लड़े। 9670 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे। 
दद्दू प्रसाद अब करीब 26 महीने बाद फिर अपने पुराने घर यानी बसपा में लौट गए हैं। दिल्ली में दो दिन पूर्व पार्टी मुखिया मायावती ने उन्हें बसपा में शामिल कर लिया। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में दद्दू प्रसाद ने कहा कि बसपा खराब दौर से गुजर रही है। यह बहुजन समाज के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिर्वतन चाहने वालों को इस दौर में बसपा के झंडे तले इकट्ठे होकर ‘बहन जी’ (मायावती) का साथ देना चाहिए। यह वक्त का तकाजा है। 

प्रोफाइल : 

1993 - मानिकपुर से पहला विधान सभा चुनाव लड़े और हारे। 
1996 - मानिकपुर से चुनाव लड़े और जीते। 
2002 - मानिकपुर से चुनाव लड़े और जीते। 
2007 - मानिकपुर से चुनाव लडने के बाद जीते और फिर मंत्री बने। 
बसपा कोआर्डिनेटर के रूप में बुंदेलखंड, कानपुर, गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, बनारस मंडलों समेत उत्तराखंड, एमपी, दिल्ली, हिमाचल का काम संभाला। 
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