आईआईटी में शुक्रवार को लोकनृत्य और गायन पर आईआईटियंस जमकर झूमे। असम के कलाकारों ने असम का कलात्मक बिहू नृत्य प्रस्तुत करके वाहवाही बटोरी। डॉ. प्रसन्ना गोगई के दल गौहरी ने असली लोक जीवन और जीवंतता का हर्षोल्लास दर्शाया।
दूसरी तरफ राजस्थान के बाबू खां मागणयार की टीम ने मांगणीयार लोकगीत प्रस्तुत किया। आईआईटी कानपुर की एलमनाइ मीट (पूर्व छात्र सम्मेलन) का शुक्रवार को उद्घाटन डायरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया। इसके बाद 1984 बैच के 35 आईआईटियंस एयर स्ट्रिप गए।
यहां पैरा ग्लाइडर का आनंद लिया। नेशनल विंड टनल फैकल्टी, डिजाइन डिपार्टमेंट, एकेडमिक एरिया और कंप्यूटर सेंटर भी गए। यहां लैब, लाइब्रेरी और रिसर्च की व्यवस्था देखी। फिर हॉस्टल, लेक्चर हाल कांप्लेक्स और मेस में जाकर पुरानी यादें ताजा कीं।
30 साल बाद आईआईटी में आने वाले पूर्व छात्रों ने कैंपस देखकर खुश हो गए। ज्यादातर ने कहा कि कैंपस की सुंदरता बढ़ गई है। पेड़-पौधे और हरियाली कैंपस को विश्व स्तरीय बना रहे हैं। भवन निर्माण की गुणवत्ता और तकनीक की भी पूर्व छात्रों ने तारीफ की है।
देरशाम आडिटोरियम में फोक डांस और गायन का आयोजन किया गया। यहां एकत्रित आईआईटियंस ने भारतीय सभ्यता, संस्कृति पर आधारित गीत-संगीत के कार्यक्रम में हिस्सा लिया। राजस्थानी और असम के कलाकारों ने मनमोहक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
डीन ऑफ एलमनाइ प्रो. प्रभात मुंशी ने बताया कि 1984 बैच के आईआईटियंस का मुख्य कार्यक्रम शनिवार को होगा। डायरेक्टर लंच, डायरेक्टर स्पीच होगा।
आम के बगिया में नाश्ता, गीत-संगीत की व्यवस्था की गई है। इस बैच के आईआईटियंस भी गुरु दक्षिणा देंगे। इसका मन बनाकर आए हैं। इस बैच के कोआर्डिनेटर आईएएस अधिकारी हैं।