जांच समिति ने सोमवार को पीड़ित छात्र प्रशांत कुमार को विश्वविद्यालय बुलाया था। छात्र से करीब आधे घंटे पूछताछ हुई। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी को भी बुलाया गया था। उससे भी पूछताछ हुई। हालांकि आरोपी की पहचान बताने से विश्वविद्यालय प्रशासन से इनकार कर दिया।
विश्वविद्यालय की जांच से भी अब साफ हो गया है कि छात्र की मार्कशीट और डिग्री में फर्जी तरीके से परिवर्तन कराया गया था। इसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्यों कुलपति, परीक्षा नियंत्रक और रजिस्ट्रार मामले में दोषियों पर एफआईआर करवाने से बच रहे हैं।
दरअसल प्रशांत कुमार नाम के छात्र ने यहां एसजे लॉ कॉलेज से सत्र 2014-17 के मध्य एलएलबी की पढ़ाई की थी। छात्र एलएलबी करने के बाद उसने हाईकोर्ट में वकालत करने के लिए बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराने की प्रक्रिया शुरू की। छात्र ने अपने सभी शैक्षिक दस्तावेज लगाए।
वहां से जब मार्कशीट और डिग्री का सत्यापन हुआ तो मालूम चला कि विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड में उस रोल नंबर पर किसी प्रशांत कुमार भारती पुत्र राम देव भारती का नाम दिख रहा है। इस पर कौंसिल ने प्रशांत को नोटिस जारी करते हुए सभी मूल दस्तावेजों को जमा करवा लिया।
प्रशांत ने ‘अमर उजाला’ की मदद से जब इसकी पड़ताल की तो मालूम चला कि विश्वविद्यालय में उसके रिकॉर्ड में हेराफेरी करके किसी ने उसके नाम और पिता के नाम में परिवर्तन करा दिया है। संशोधन के लिए उस शख्स ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट भी जमा की थी। प्रशांत ने जब उस मार्कशीट पर दिए नंबर को ऑनलाइन चेक किया तो वह किसी सरोज नाम की लड़की का निकला। यह सब करने में विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारी भी शामिल थे।
फिलहाल मुझे जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। मंगलवार को मैंने इस मामले में परीक्षा नियंत्रक, रजिस्ट्रार व जिम्मेदार अधिकारियों की बैठक बुलाई है। बैठक में इस तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नियम-कानून तैयार करने पर चर्चा की जाएगी। इस फर्जीवाड़े मामले में अगर विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी की मिलीभगत है तो उस पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। -प्रो. नीलिमा गुप्ता कुलपति, सीएसजेएमयू