दस्तावेजों में कथित अनियमितता के भी आरोप
विश्वविद्यालय के अनुसार प्रो. रंगा पर नौकरी के दौरान पूर्व नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रस्तुत न करने, जाति और निवास संबंधी दस्तावेजों में कथित अनियमितता के आरोप भी लगे थे। आरोप है कि झांसी में नियुक्ति के समय उन्होंने हरियाणा का निवासी होने का उल्लेख किया था और वहीं का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था। इन मामलों के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय ने जांच बैठाई थी और उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
नोटिस का जवाब नहीं देने का भी आरोप
विश्वविद्यालय का कहना है कि जांच के दौरान प्रो. रंगा कई बार सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और न ही उन्हें जारी नोटिसों का जवाब दिया। इसके बाद कार्यपरिषद ने उपलब्ध जांच रिपोर्ट और अभिलेखों के आधार पर सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।