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Kanpur News: आईआईटी पर होते करोड़ों खर्च, इंजीनियर बनते ही छात्र चले जाते विदेश, बने नीति

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कानपुर। सर आईआईटी कानपुर में छात्रों के ऊपर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन पढ़ाई पूरी होते ही कई विद्यार्थी विदेश निकल जाते हैं। ब्रेन-ड्रेन की यह समस्या बड़ी है। इंजीनियर्स के विदेश जाने पर भी कुछ नीति बनाई जानी चाहिए।
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एचबीटीयू में आयोजित समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश 2047 अभियान के तहत आपका सुझाव लाएगा बदलाव कार्यक्रम में यह सुझाव जीजीआईसी नर्वल की डॉ. प्रज्ञा अवस्थी ने दिया। कार्यक्रम में मौजूद मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने इस पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा कि निश्चित ही यह बड़ी समस्या है। उनके समय में 80 फीसदी छात्र विदेश चले जाते और कुछ साल बाद लौट आते। हालांकि उन्होंने चुटकी ली कि अमेरिका ऐसी व्यवस्था कर रहा है जिससे छात्र स्वयं ही विदेश जाने से बचेंगे।
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कार्यक्रम में प्रदेश को विकसित बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने शिक्षक, छात्र व प्रबुद्धजनों से सुझाव मांगे। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री के सलाहकार, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, इंजीनियर राकेश सिंह ने किया।

इसके बाद अवनीश अवस्थी, रिटायर्ड आईएफएस बाबूराम अहिरवार, रिटायर्ड प्राचार्य डॉ. चुन्ना सिंह, डॉ. शंकर सिंह, राकेश सिंह के साथ कुलपति, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव, डीएम, सीडीओ दीक्षा जैन ने सुझाव सुने।

डॉ. प्रज्ञा अवस्थी ने कक्षा 12 तक बेटियों की पढ़ाई निशुल्क करने के साथ स्कूल आने-जाने के लिए साधन की व्यवस्था कराने का सुझाव दिया। प्राथमिक विद्यालय की शिक्षक अल्पना मौर्या ने कहा कि बीएलओ ड्यूटी से फुर्सत मिले तो छात्रों के भविष्य को संवारा जाए। रामा यूनिवर्सिटी के छात्र मुकेश चंद्र ने कहा कि परीक्षा केंद्र गृह जनपद में ही बनाना चाहिए। दूर दराज से आने की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

अवनीश अवस्थी ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे बड़ी होगी। वह केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहकर नीतियों के निर्माण और क्रियान्वयन में योगदान दें। अपर मुख्य सचिव अनुराग श्रीवास्तव ने युवाओं को केवल नौकरी तक सीमित न रहने और उद्यमिता, स्टार्टअप व शोध के क्षेत्र में योगदान करने के लिए प्रेरित किया।
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