इसके लिए 750 रुपये लगेंगे। छात्र ने पिता के मोबाइल से रकम ट्रांसफर कर दी। इसके बाद दूसरी बार में भी इतनी रकम ट्रांसफर की। बाद में साइबर ठग ने 20 दिनों के भीतर एक के बाद एक ट्रांजेक्शन कर कुल पांच लाख रुपये खाते से उड़ा दिए।
पिता के मोबाइल से डिलीट कर देता था मैसेज
जितनी बार भी पेमेंट किया जाता था उसका एक मैसेज छात्र के पिता के मोबाइल पर आता था। पिता को न पता चले इसलिए छात्र वह मैसेज डिलीट कर देता था। यही वजह है कि चंद्रशेखर को पैसे निकलने की जानकारी ही नहीं हो सकी। जब पता चला कि उन्होंने बेटे को फटकार लगाई और पुलिस को सूचना दी।
सावधानी बरतें
- गेम के लती होने से बचें
- अभिभावक बच्चों की निगरानी करें, जिससे वह गेम के लती न हों
- गेम खेलने के दौरान कोई पेमेंट को कहा जाए तो कतई न करें
- गूगल या यूट्यूब की मदद से किसी भी कंपनी, गेम्स आदि संबंधी हेल्पलाइन नंबर न तलाशें
- गेमिंग में पैसों के लालच में आकर किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें
- गेमिंग में अगर कोई स्टेज पार करने के लिए शर्त रखी जाए तो उसको बिल्कुल भी न करें
क्राइम ब्रांच तफ्तीश कर रही है। कुछ अहम जानकारी मिली है। उम्मीद है कि साइबर ठग जल्द गिरफ्त में होगा। अभिभावक को सतर्क रहने की जरूरत है। जिससे बच्चे इस तरह के जाल में न फंसें। - आनंद प्रकाश तिवारी, एडिशनल सीपी