कानपुर में नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत घाटों को सुंदर बनाने में जमकर गड़बड़झाला किया गया। अटल घाट पर प्रधानमंत्री के गिरने के कारण सामने आई गड़बड़ी का तो आनन-फानन में सुधार शुरू करा दिया गया, लेकिन बाकी घाटों पर हुए काम घोटालों और लापरवाही की कलई खोल रहे हैं।
मंगलवार को अमर उजाला ने कुछ घाटों पर काम की पड़ताल की तो सारा मामला सामने आ गया। बड़ा सवाल यह है कि काम कराने वाली संस्था की लापरवाही पर निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी क्या करते रहे। अब गड़बड़ी सामने आईं हैं तो क्या इन पर कार्रवाई होगी।
सिद्धनाथ घाट की सीढ़ियां अधूरी, मानक की धज्जियां उड़ीं
जाजमऊ स्थित सिद्धनाथ घाट के सुंदरीकरण के काम में पूरी तरह से लापरवाही बरती गई। सीढ़ियों को अधूरा छोड़ा गया है। इसके अलावा जो काम हुए, वे भी मानक के विपरीत हैं। सीढ़ियां टेढ़ी-मेढ़ी और मानक से नहीं बनाई गई हैं।
घाट के किनारे रहने वालों ने बताया कि सीढ़ियां अलग-अलग आकार में बना दी गईं। इससे चढ़ने और उतरने में समस्या होती है। कई सीढ़ियां टेढ़ी-मेढ़ी भी बना दी गई हैं। साथ ही आधे स्थान में तो सीढ़ी अधूरी छोड़ दी गई। इसके नीचे से मिट्टी भी हटने लगी है, इस कारण सीढ़ी धंसने का डर भी है। सीढ़ियों के पत्थर भी कई जगह से टूट रहे हैं।
बिठूर घाट में गिरने लगे पत्थर, चटकी दीवारें
नमामि गंगे के अंतर्गत बिठूर के कई घाटों के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण का काम कराया गया। अभी एक साल भी नहीं बीता कि घाटों पर लगाए गए पत्थर टूटने-उखड़ने लगे हैं। कई घाटों की सीढ़ियों की दीवारें तक चटक गई हैं।
बिठूर के पौराणिक घाट ब्रह्मावर्त, बारादरी, रानी लक्ष्मीबाई घाट की दीवारों पर लगाए गए लाल पत्थर उखड़कर नीचे गिर गए हैं। रानी लक्ष्मीबाई घाट पर लगा दरवाजा भी उखड़ रहा है। कौशल्या घाट और भैरव घाट की दीवारों पर दरारें दिखने लगी हैं। घाटों पर लगी रेलिंग भी हिल रही है।