दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज से आए तब्लीगी जमाती कोरोना संक्रमण के सबसे बड़े वाहक बनकर उभर रहे हैं। पिछले दिनों जमातियों की बदसलूकी के कई मामले सामने आए थे। ये मामले न सिर्फ इलाज कर रहे डॉक्टरों के लिए परेशानी का सबब बने, बल्कि समाज के लिए भी चिंताजनक थे।
अब जमातियों को अपनी जान जाने का डर सताने लगा है। कानपुर के हैलट अस्पताल के कोविड-19 वार्ड में भर्ती तीन जमातियों को अपनों की याद सताने लगी है। सीएचसी के डॉक्टर सीएल वर्मा ने बताया कि ये लोग लगातार फोन पर अपनों से बात करते नजर आते हैं। साथ ही इनके व्यवहार में भी काफी बदलाव आया है। हैलट अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक आरके मौर्या का कहना है कि अब ये लोग शांत हैं और समय से दवा भी ले रहे हैं।
पिछले दिनों कानपुर के मंधना स्थित रामा मेडिकल कॉलेज से सरसौल सीएचसी में भर्ती कराए गए कोरोना संक्रमित जमाती की हरकतों से अस्पताल प्रशासन परेशान हो गया था। मरीज ने आइसोलेशन वार्ड के दरवाजे की कुंडी अंदर से बंद कर ली थी। काफी मशक्कत के बाद जब उसने कुंडी खोली तो डॉक्टरों से गालीगलौज करने लगा। इसके बाद उन पर थूका भी था। यही नहीं हैलट में भर्ती जमातियों ने तो दवा लेने से ही इनकार कर दिया था।