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कोरोना से हाहाकार: बिना इलाज सड़कों पर मरने की नौबत, कई मरीज घरों में गिन रहे अंतिम सांसें

Sat, 17 Apr 2021 12:08 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों में बेडों की कमी बताकर तीसरे दिन भी मरीज लौटाए गए। कंट्रोल रूम की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ, जबकि अब यहां फोन कॉल रिसीव करने के लिए तीन के बजाय छह लाइनें कर दी गई हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। इलाज के इंतजामों की भयावहता चिंताजनक है। कोविड स्टेटस वाले अस्पतालों में बेडों की कमी बताकर तीसरे दिन भी मरीज लौटाए गए। कंट्रोल रूम की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ, जबकि अब यहां फोन कॉल रिसीव करने के लिए तीन के बजाय छह लाइनें कर दी गई हैं।
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हालत यह है कि कोरोना संक्रमितों को न तो इलाज मिल रहा है न ही उनकी काउंसलिंग की जा रही है। यानी जिले में किसी को कोरोना हुआ तो अब बिना इलाज घरों और सड़कों पर मरने की नौबत आ गई है। जिले में बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित होम आइसोलेट हैं।

मगर उन्हें इलाज नहीं मिल रहा, वे अंतिम सांसें गिन रहे हैं। कोविड अस्पतालों में मरीजों के भर्ती न करने का मामला हो या प्राइवेट अस्पतालों में बेडों की दलाली की बात हो, या फिर कोविड कमांड सेंटर में फोन न उठने की। प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए गए अब तक के इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं।
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हालांकि सुधार के लिए बैठकें खूब हो रही हैं। मगर असर नहीं दिख रहा है। शहर में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात से लोग डरे हुए हैं। निजी अस्पतालों ने इस आपदा को लूट का अवसर बना लिया है। स्वास्थ्य विभाग अभी तक इस बात की जांच नहीं कर सका कि बेड खाली होने के बाद मरीज भर्ती क्यों नहीं किए जा रहे। 

बेडों की संख्या बढ़ाने के लिए 14 और अस्पतालों को कोविड स्टेटस का दर्जा दिया गया है। हर मेडिकल स्टोर में होम आइसोेलेशन किट उपलब्ध होने के आदेश जारी किए। अनियमिताओं पर कार्रवाई भी हो रही है। पूरा प्रयास है कि लोगों को बेहतर इलाज मिले। - आलोक तिवारी, जिलाधिकारी 

केस-1
बाबूपुरवा निवासी निरंजन पाल सिंह (56) की शुक्रवार को इलाज के अभाव में मौत हो गई। वे अर्मापुर आर्डिनेंस फैक्टरी के निदेशक के पीए थे। परिजन उन्हें एंबुलेंस में लेकर हैलट से लेकर प्राइवेट अस्पतालों के दरवाजे खटखटाते रहे, लेकिन उन्हें कहीं भी भर्ती नहीं किया गया।

जूही लाल पैलेस के पास एंबुलेंस में ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया तो मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें अंतिम संस्कार के लिए शव के साथ फिर से हैलट भेज दिया। बेटे कमल ने बताया कि पिता को शुक्रवार की सुबह एंबुलेंस बुक करा कर फॉर्च्यून अस्पताल गए। यहां करोनो संक्रमण की पुष्टि हुई। हालत खराब होने पर हैलट, रीजेंसी अस्पताल ले गए लेकिन मना कर दिया गया। जूही लाल पैलेस के पास एक अस्पताल ले जाते समय पिता ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। 

केस-2 
वाई ब्लॉक किदवई नगर निवासी एक महिला की सांसें तेज चलने लगीं, तो पति उन्हें लेकर रीजेंसी पहुंचे। कोरोना की जांच हुई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। पति ने वहीं भर्ती करने की गुहार लगाई। अस्पताल ने बेड न होने की बात कहकर मना कर दिया। युवक ने कोविड कमांड सेंटर फोन मिलाया।
 
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घंटी बजती रही किसी ने फोन नहीं उठाया। इसके बाद युवक ने सीएमओ की ओर से जारी किए गए नंबरों पर फोन मिलाया। सभी नंबर नॉट रीचेबल बताते रहे। वह कई और अस्पताल गया लेकिन कहीं भर्ती नहीं किया गया। बाद में वह हैलट गया। हैलट से उसे होम आइसोलेशन में भेज दिया गया। 

केस-3 
शिवराजपुर की महिला को बुखार खांसी और दम घुटने की शिकायत थी। सुबह वह हैलट आई। जांच में कोरोना निकला। उनकी हालत ऐसी थी कि तत्काल ऑक्सीजन चाहिए था। मगर डॉक्टरों ने उन्हें बेड न होने का हवाला देकर घर में रहकर ही इलाज कराने का सुझाव दिया।

मरीज की हालत गंभीर होते देख उनके पति ने कोविड कमांड सेंटर फोन किया मगर फोन मिला ही नहीं। सीएमओ ने जिन तीन अधिकारियों के नंबर जारी किए वे बंद मिले। सिर्फ सुबोध प्रकाश ने फोन उठाया। मगर बेड का इंतजाम न होने की बात कहकर उन्होंने भी फोन रख दिया। अब महिला के परिजन उसे घर ले आए और झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर हैं। 
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