कोरोना महामारी पूरे देश में कहर बरपा रही है। रोजना लाखों की संख्या में संक्रमित सामने आ रहे हैं। इस सब के बीच इलाज न मिलने और ऑक्सीजन की किल्लत से मरीजों की सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं।
कानपुर के जवाहरलाल रोहतगी चिकित्सालय में भर्ती ऊषा अग्रवाल (60) की आईसीयू और वेंटिलेटर न मिलने से शनिवार रात को जान चली गई। इतना ही नहीं उनका शव 13 घंटे तक इसी अस्पताल में पड़ा रहा।
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पति कैलाश अग्रवाल, रिश्तेदार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत शव भैरव घाट विद्युत शवदाह गृह पहुंचाने के लिए कोविड कमांड सेंटर, अफसरों के फोन मिलाते रहे पर सुनवाई नहीं हुई। काफी प्रयास के बाद शव का अंतिम हो सका।
रतन आर्बिट इंदिरा नगर निवासी कैलाश अग्रवाल की पत्नी ऊषा को एक हफ्ते से बुखार आ रहा था। जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई। काफी प्रयास के बाद 20 अप्रैल को उन्हें जवाहर लाल रोहतगी अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती किया गया।
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कैलाश ने बताया कि शनिवार रात 10:30 बजे पत्नी से मोबाइल पर बात की थी, तब वह पहले से बेहतर महसूस कर रही थीं। देर रात 2:00 बजे अस्पताल से फोन आया कि अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने से मौत हो गई।