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खाली कच्छा पहिने नहाय, कभों एक्सपोज नाही किया: राजू श्रीवास्तव

Mon, 11 Feb 2019 05:08 PM IST
shubham यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
दोस्तों जइसा कि हम लोगन का पहिले बताय रहन कि हम आपन दोस्त संकठा, संतोस, मनोहर अउर पुत्तन के साथ गे रहन कुम्भ.. भय्या अबकी बहुत सरदी आय तो कुम्भ नहाय मा चोंक लेत रही.. श्यामनगर वाले पुत्तन तो पानी मा उतरेन नाही चाहत रहैं..
 
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डेमो पिक
पुत्तन कहिन एक शर्त पे नहइबे.. हम जइसेहे नहाय के बाहर निकली तो तुम्हरे हाथ मा गरम गरम चाय केर कुल्हड़ होय के चाहि..  हमका आइडिया ना रहा कि इत्ती ठण्ड मा बरसात हुई जइहै.. देखो मलवां तक तो हमरा नहाय केर मन रहा.. खागा केर बाद हमरा मन बदल गवा.. संतोस कहिन अरे ई कांचू होय.. इनका छोडो चलो हम लोगे स्नान करि.. हम लोगे हर हर महादेव केर जयकारा लगावत त्रिवेणी मा उतरी गे..
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डेमो पिक
अभीन दुई डुबकी लगावा रहै कि संकठा पानी मा चिल्लावे लाग अरे हमरे पैर मा सांप लिपटि गा...सांप लिपटि गा.. हम सबै उनका बाहर निकालेन तो देखा उनके पैर मा फूल माला लिपटी रही.. हम लोगे फिर संगम मा डुबकी लगावे लगे.. तबहीं एक नाव हमरे बगल से गुजरी तो ओका मल्लाह हमसे कहे लाग अउर राजू भईया.. बहुतै भागसाली हौ आप.. साक्षात् महादेव संगै स्नान करि रहे हौ.. हम ध्यान से देखा तो हमरे बगलै मा एक ठो सांप लहरावत रहा..

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डेमो पिक
अरे हमरा तो दम सूख गवा.. खैर उई तैर के आगे निकसि गे तब हमरी जान मा जान आई.. कुछ लोग हमरी फोटू खींचे लाग.. हम कहा यार खाली कच्छा पहिने नहाय रहे हन.. हम कभों एक्सपोज नाही किया हन.. बाद मा हम सबै स्नान करि के संगम किनारे बइठे रहे तबहीं मनोहर कहे लाग,  गुरु एक बात हम नोटिस किये हन कि सरदी केर मौसम मा तलाक बहुत कम होत हैं.. तो संकठा हुमक के बोले यार मनोहर तुमका ई सब जगह पे अइस मुराही केर बात काहे सूझत है..
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डेमो पिक
आगे हम लोगे देखेन कि अबकी कइसे कइसे विचित्र नागा बाबा आय रहैं.. कौनो एक पैर पे खड़ा होय.. हठ योग किये हैं.. कौनो सेल्फी बाबा रहै.. कौनो हाईटेक बाबा रहा लैपटॉप वाला.. कौनो के पास बजूका बाइक रही तो कौनो के पास हार्ले डेविडसन .. कौनो लक्जरी कार लई के आवा रहै.. अबकी कुम्भ नहाय मा हम नोटिस किया कि हम जहाँ से भी गुजरे सब बाबा नागा लोग हमका देख के कहत रहे अउर गजोधर भईया..!! का हाल हैं..!! हम कहा यार ये बाबा लोगन के पास टीवी ईवी तो होत नाही तो फिर हमका कइसे पहिचानत हैं..
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डेमो पिक
तो हमका कोऊ बताईस कि अबकी हर अखाड़ा अउर शिविर मा टीवी लाग हैं.. कोऊ कोऊ शिविर मा तो होम थिएटर सिस्टम लगा होय.. वइसे अबकी कुम्भ मा आधुनिकता भी दिखाई पड़ी.. तबहीं भक्क सानी बिजली चलि गे.. तो हुंवा बहुत सारे अखाड़ा मा जनरेटर केर भी इंतिजाम रहा.. दुई मिनट मा बत्ती आय गयी.. तबहीं हम लोगन का एक गय्या घूमत भई मिली.. हम कहा माताजी कहाँ सरदी मा घूमि रहि हौ.. हमरे पास गुड अउर तिल्ली केर लड्डू रहैं तो हम उई गय्या का खवावा..
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डेमो पिक
तबहीं एक बूढ़ी अम्मा आईं.. कहे लाग ई हमरी गय्या आय.. हम कहा अम्मा आप कुम्भ मेला आई हौ तो आपन गय्या का काहे साथ लै आईव.. तो उई कहिन बच्चा हम सब लढिया मा बइठ के हिंया आय गे.. घर मा कौनो बचा नाय.. केके सहारे एका हुंवा छोड़तेन.. दोस्तों आगे केर कहानी सुनाईब आपन कुम्भ यात्रा केर आखिरी भाग मा..लास्ट मा हम एक्कै बात कहे चाहित है कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है .. 
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