शीत लहर के साथ फ्लू का हमला तेज हो गया है। हालात यह हैं कि हर घर में खांसी-जुकाम का एक रोगी है। हैलट, उर्सला और निजी अस्पतालों की ओपीडी में फ्लू के रोगी आ रहे हैं। साथ ही इमरजेंसी में हार्ट, ब्रेन अटैक, गुर्दा और लिवर फेल के रोगी आ रहे हैं।
शनिवार को तीन रोगियों की मौत हो गई। इनमें दो को हार्ट अटैक पड़ा और एक दमा रोगी था। ब्लड प्रेशर बढ़ने से रोगियों के गुर्दे फेल हो रहे हैं। रोगियों को डायलिसिस के लिए अस्पतालों में भर्ती किया गया है। दमा और अस्थमा के रोगी भी अस्पतालों में भर्ती हैं।
इसके अलावा फ्लू रोगियों में निमोनिया के लक्षण उभर आए हैं। ठंड बढ़ने के साथ फ्लू की चपेट में बच्चे, बूढ़े और बडे़ सभी आ रहे हैं। कुछ फ्लू रोगियों में निमोनिया के लक्षण उभरे हैं। इससे पोस्ट कोविड रोगियों को सांस की दिक्कत बढ़ गई है।
कई रोगी गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। कॉर्डियोलॉजी की इमरजेंसी में रोगी सांस फूलने और सीने में दर्द की शिकायत लेकर आ रहे हैं। रावतपुर के दमा रोगी राजेश कुमार (48) की शनिवार को मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि उनको गुर्दे की भी दिक्कत रही है।
उनका इलाज चेस्ट हॉस्पिटल में चल रहा था। इसी तरह जाजमऊ के अरशद (55) की हार्ट अटैक से मौत हुई। उन्हें लालबंगला स्थित एक अस्पताल ले जाया गया था। इसी तरह काकादेव की राजकुमारी (62) की शुक्रवार देररात हार्ट फेल से मौत हो गई। दो दिन से उनका ब्लड प्रेशर अनियंत्रित था। कॉर्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा का कहना है कि ब्लड प्रेशर के रोगी खासतौर पर एहतियात बरतें। दवा की डोज दुरुस्त कराने से बीपी सामान्य रहेगा।