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CM योगी के गुरू ने बताए उनके छात्र जीवन के ये अनसुने पहलू, ऐसे थे योगी आदित्यनाथ

Sun, 10 Sep 2017 11:10 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने शिक्षक नागेंद्र नाथ वाजपेयी के साथ सीएसए कानपुर में (पुरानी फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीवनशैली और विचारों के बारे में हम सभी कुछ न कुछ जानते हैं। लेकिन यहां हम आपको CM योगी  के कुछ अनसुने, अनजाने  पहलुओंं से परिचित कराते हैं जिनके बारे में बात करते हुए उनके गुरू भावुक हो गए...
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सीएम योगी के गुरू नागेंद्र नाथ वाजपेयी ने बताया कि योगी छात्र जीवन से ही नकलविहीन परीक्षा के पक्षधर रहे हैं। उनका मानना है कि नकल करने वाले छात्र मेधावियों के हितों का हनन करते हैं। जहां मेरिट से चयन होता है, वहां मेधावी पिछड़ जाते हैं। वे राजकीय इंटर कालेज गजा टिहरी में योगी आदित्यनाथ के कक्षा 9-10 में कक्षा अध्यापक रहे थे। गुरुवार को कानपुर शहर आए योगी ने विशेषतौर पर अपने गुरु को बुलवाकर मुलाकात की थी। 

 
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स्कूल में योगी का नाम अजय मोहन विष्ट था

सीएम योगी के शिक्षक नागेंद्र नाथ वाजपेयी
कानपुर निवासी नागेंद्र नाथ वाजपेयी ने बताया कि स्कूल में योगी का नाम अजय मोहन विष्ट था। उनमें बचपन से ही संस्कार और अनुशासन कूट -कूट कर भरे थे। वह स्कूल प्रवेश करते ही सभी शिक्षकों का आदर सम्मान करते थे। इसके बाद हमेशा आगे की पहली सीट पर बैठते। पठन-पाठन हो या स्कूल के आयोजन की तैयारी, हमेशा समय से पूर्ण करते। शुरूआत से ही उनकी शैली में अनुशासन दिखता था। स्कूल में योगी फुटबाल और कबड्डी के कुशल खिलाड़ी रहे।  

योगी की गणित, विज्ञान में रुचि  
नागेंद्र नाथ ने बताया कि योगी आदित्य नाथ (अजय मोहन विष्ट) को गणित और विज्ञान विषय में विशेष रुचि रही। अजय मोहन के साथ इनके बड़े भाई मानवेंद्र विष्ट और छोटे भाई महेंद्र विष्ट एक ही स्कूल में पढ़ते थे। योगी मेरे घर पर गणित सीखने आते थे।  
 
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योगी ने पूछा, गुरु जी परिवर्तन नजर आता है 

सीएम योगी के टीचर नागेंद्र नाथ
नागेंद्र नाथ ने बताया कि गुरुवार को सीएसए में योगी आदित्यनाथ ने उनसे पूछा कि आपको प्रदेश में कुछ परिवर्तन नजर आ रहा है, इस पर कहा कि शिक्षा के क्षेत्र के बदलाव से ही सारे क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन दिखेगा। इस दिशा में काम कर रहे हैं।  

कैसे मिले गुरु-शिष्य  
नागेंद्र नाथ ने बताया कि वह अपने पैतृक गांव खोजऊपुर रूमा कानपुर में थे। गुरुवार सुबह 10 बजे एक फोन आया। उस व्यक्ति ने परिचय दिया कि मुख्यमंत्री जी का निजी सचिव बोल रहा हूं। कहा कि मुख्यमंत्री आज आपसे सीएसए में मिलना चाहते हैं। यह सुनकर वह आश्चर्य चकित रह गए। इसके बाद जिलाधिकारी ने फोन कर गांव में गाड़ी भेजने की बात कही। मैने उन्हें अपने साधन से पहुंचने की बात कही। वह गांव से बेटे के पास बर्रा स्कूटर से पहुंचे, जहां से बेटे की कार से सीएसए पहुंचे।
 
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