जनसभा को संबोधित करते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
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आल्हा-ऊदल की नगरी पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को सबसे पहले गोरखगिरि पर्वत पर पूजा-अर्चना की। इसके बाद मोदी ग्राउंड में बटन दबाकर 697 करोड़ की 88 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ की तपोस्थली गोरखगिरि पर रोपवे बनाने और यहां एडवेंचर टूरिज्म विकसित करने की बात कही। कहा कि बुंदेलखंड में बनने वाली तोप और बंदूक से दुश्मन थर-थर कांपेगा। पहले यूपी में माफिया हावी थे, अब अपराधी थर-थर कांपते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के डिफेंस मेन्यूफेक्चरिंग काॅरिडोर में जो ब्रह्मोस मिसाइल बनी, वह जिस दिन ऑपरेशन सिंदूर में दागी गई तो पाकिस्तान हाय-तौबा करते हुए दुनिया के अंदर माफी मांगता घूम रहा था। दुम दबाकर जान की भीख मांग रहा था...। पाकिस्तान भारत से क्या लड़ पाएगा। यह डिफेंस कॉरिडोर ने बनी मिसाइल ने साबित करके दिखाया है। हम इसी क्षेत्र में महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट व झांसी को विकसित करना चाहते हैं। यहां की धरती और युवाओं में वह ऊर्जा है।
उन्होंने बिना नाम लिए सपा पर निशाना साधा, कहा कि जो लोग कब्जा करते हैं, वो नकारात्मक काम करते हैं। उन लोगों ने ही प्रदेश को डुबोया था। भाजपा सरकार ने बुंदेलखंड व महोबा को नई पहचान देने के साथ ही माफिया को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। बुंदेलखंड को एक्सप्रेसवे से जोड़ा है।
कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जब बुंदेलखंड पहली बार आए तो यहां की कनेक्टिविटी खराब थी। माफिया, खनन माफिया, भू और वन माफिया हावी थे। सामान्य नागरिक के जीवन में परिवर्तन तो दूर यहां की बहनें मिट्टी का घड़ा लेकर पूरा जीवन काट देती थीं। उस मिट्टी के घड़े ने उनके जीवन को ऐसा बनाकर रखा था कि कोई पूछने वाला नहीं था। आज भाजपा सरकार ने हर घर नल से जल योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया है। आने वाले समय में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश पहचान के लिए मोहताज था। माफिया हावी थे, उत्सव के पहले उपद्रव हो जाता था। अराजकता पहचान बन चुकी थी। न बेटी, न व्यापारी सुरक्षित था। गरीबों को उनका अधिकार नहीं मिल पाता था। विकास की योजनाएं ठप पड़ी थीं। महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, बांदा, झांसी तब भी थे लेकिन पहचान के लिए मोहताज थे। कनेक्टिविटी नहीं थी लेकिन अब सरकार भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बुंदेलखंड में बनाने जा रही है। केन-बेतवा नहर परियोजना का काम तेजी से चल रहा है। यह परियोजना पूरी होने पर बुंदेलखंड में जल की समस्या का पूरा समाधान हो जाएगा।