कानपुर देहात। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों के लिए भेजे गए 24 में से सिर्फ चार वेंटिलेटर चालू होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही नाराजगी जताई हो, लेकिन जिम्मेदार अफसरों को इससे कोई फर्क पड़ता नजर नहीं आ रहा। हालत यह है कि अभी भी 11 वेंटिलेटर खराब पड़े हैं। जबकि 9 वेंटिलेटर स्टाफ की कमी से शोपीस बने हैं। वहीं अफसर वेंटिलेटर चालू न होने का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़कर जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
कानपुर दौरे के दौरान शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर देहात समेत अन्य जिलों के प्रशासनिक व स्वास्थ्य अधिकारियों से संवाद किया था। डीएम ने जैसे ही वेंटिलेटर खराब होने की बात कही तो मुख्यमंत्री ने नाराजगी जता दी। उन्होंने कहा कि खराब वेंटिलेटर की अब याद आ रही है। इस पर मौजूद अन्य अफसर भी बगलें झांकते नजर आए।
मालूम हो कि कोरोना की पहली लहर से निपटने के लिए पिछले साल शासन से 24 वेंटिलेटर भेजे गए थे। उस दौरान जिला अस्पताल अकबरपुर के ट्रामा सेंटर में बने कोविड एल-टू अस्पताल में सिर्फ चार वेंटिलेटर ही क्रियाशील किए गए। जबकि 20 को स्टोर में कबाड़ होने के लिए रख दिया गया।
इस साल कोरोना की दूसरी लहर आई तो रखे वेंटिलेटर की याद आई, लेकिन अधिकांश के उपकरण ही गायब मिले। इसकी कीमत कई मरीजों को जान देकर चुकानी पड़ी। बड़ी संख्या में मरीजों को वेंटिलेटर न होने की बात कहकर बैरंग लौटा दिया गया। अब सीएम ने नाराजगी जताई तो फिर से वेंटिलेटर चालू करने की कवायद शुरू की गई है।
छह वेंटिलेटर एग्वा कंपनी के हैं। जो पूरे प्रदेश में चालू नहीं हो सके हैं। इसके अलावा पांच वेंटिलेटर के उपकरण ऑर्डर देकर मंगाए गए हैं। चार वेंटिलेटर पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, जबकि नौ वेंटिलेटर ठीक स्थिति में हैं, लेकिन डॉक्टर व स्टाफ की कमी के कारण उन्हें क्रियाशील करने में दिक्कत आ रही है। - डॉ. एसपी सिंह (प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल पुरुष)
कोविड मरीजों के लिए शासन से वेंटिलेटर सीधे जिला अस्पताल भेजे गए थे। इन्हें क्रियाशील कराने की जिम्मेदारी सीएमएस की है। वेंटिलेटर के उपकरण मंगाने व खराबी की मरम्मत के लिए पर्याप्त बजट भी दिया गया था। फिर भी समस्या थी तो बताना चाहिए। उसका निराकरण कराया जाता।
- डॉ. राजेश कटियार (सीएमओ)
एक साल बाद मिले गायब दो वेंटिलेटर
कानपुर देहात। जिला अस्पताल में वेंटिलेटर चालू न होने के मामले में अफसरों से लेकर कर्मियों की भूमिका सवालों के घेरे में रही है। शासन से पिछले साल 24 वेंटिलेटर भेजे गए, लेकिन अफसरों ने कागजों पर 22 ही दिखाए।
यही रिपोर्ट डीएम सहित अन्य उच्चाधिकारियों को भेजी गई। एक सप्ताह पहले मामला डीएम जेपी सिंह की जानकारी में आया तो दस्तावेज खंगाले गए। जिसके बाद अचानक दोनों गायब वेंटिलेटर मिलने की बात कही गई। सीएमएस ने कहा कि स्टोर को दोबारा खुलवाकर देखा गया तो दो और वेंटिलेटर रखे मिले।
दोषी स्टोर स्टाफ पर नहीं हुई कार्रवाई
कानुपर देहात। जिला अस्पताल के स्टोर में रखे वेंटिलेटर के उपकरण गायब होने के मामले की जांच खुद सीएमएस डॉ. एसपी सिंह ने की थी। उन्होंने स्पष्ट तौर पर स्टोर कर्मियों को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की रिपोर्ट सीडीओ सौम्या पांडेय को भेजी थी। डीएम ने भी बैठक में स्टोर कर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन गोलमाल करने वाले कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।