शिकायत करोगी, तो प्रताड़ित किया जाएगा
मैं भारत की सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि यौन उत्पीड़न के साथ जीना सीखे। यह हमारे जीवन का सत्य है। पोस एक्ट हमसे बोला गया एक बड़ा झूठ है। कोई सुनता नहीं, कोई परेशान नहीं करता। शिकायत करोगी, तो प्रताड़ित किया जाएगा। विनम्र रहें और जब मेरा मतलब है कि कोई नहीं सुनता, तो इसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है। आपको आठ सेकेंड की सुनवाई, अपमान और जुर्माना लगाने की धमकी मिलेगी।
न्याय तो दूर, मैं अपने लिए निष्पक्ष जांच तक नहीं जुटा सकती
तुम्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित किया जाएगा। और यदि आप भाग्यशाली हैं तो आत्महत्या का आपका पहला प्रयास सफल होगा। अगर कोई महिला सोचती है कि आप सिस्टम के खिलाफ लड़ेंगे तो मैं आपको बता दूं, मैं ऐसा नहीं कर सकती। और मैं जज हूं। न्याय तो दूर, मैं अपने लिए निष्पक्ष जांच तक नहीं जुटा सकती। मैं सभी महिलाओं को सलाह देती हूं कि वे खिलौना या निर्जीव वस्तु बनना सीखें।
उच्च न्यायालय की आंतरिक शिकायत समिति से शिकायत की
एक विशेष जिला न्यायाधीश और उनके सहयोगियों द्वारा मेरा यौन उत्पीड़न किया गया। मुझे रात में जिला जज से मिलने को कहा गया। अगले पैरे में लिखा है कि मैनें 2022 में मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद और प्रशासनिक न्यायाधीश से शिकायत की। आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। किसी ने मुझसे पूछने की जहमत नहीं उठाई कि क्या हुआ। आप परेशान क्यों हैं। मैंने जुलाई 2023 में उच्च न्यायालय की आंतरिक शिकायत समिति से शिकायत की। एक जांच शुरू करने में छह महीने और एक हजार ईमेल लग गए।
सोशल मीडिया के जरिए उन्हें वायरल पत्र की जानकारी मिली है। जब तक पीड़ित जज से बात नहीं होती पत्र की जांच या पुष्टि नहीं होती। इसलिए कुछ भी कहना संभव नहीं है। -बब्बू सारंग, जिला जज, बांदा
मई माह से बांदा में तैनात हैं महिला जज
बबेरू न्यायालय में तैनात महिला जज लखनऊ की रहने वाली बताई जा रही हैं। वर्ष 2019 में वह जज बनी थीं। उनकी पहली तैनाती बाराबंकी में हुई थी। इसके बाद मई 2023 में उनका स्थानातंरण बांदा में हुआ था। इसके बाद से वह यहां तैनात हैं। प्रतिदिन वह बबेरू न्यायालय में मुकदमों की सुनवाई के लिए जाती हैं।
महिला जज चार दिन से अवकाश पर है। यह उनका व्यक्तिगत मामला है। इस संबंध में मैं कुछ नहीं कह सकता। -शैलेंद्र कुमार, सहायक अभियोजन अधिकारी, बबेरू