मौलाना रियाज अहमद हशमती (फाइल फोटो)
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कानपुर के बरेलवी विचारधारा के शहर काजी मौलाना रियाज अहमद हशमती (85) का सोमवार को इंतकाल हो गया। वह काफी वक्त से बीमार चल रहे थे। बाबूपुरवा क्षेत्र के बगाही कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मंगलवार को शहर के अलग-अलग हिस्सों मेें ताजियती मीटिंग हुईं जिनमें रंजो-गम का इजहार किया गया।
उनकी मगफिरत की दुआ की गई। शहर काजी कौशांबी के कस्बे पहाड़पुर के रहने वाले थे। करीब 50 साल पहले वह कानपुर आए थे। यहां पर उन्होंने मदरसा अल जामियतुर्रजविया मनाजिरुल उलूम कायम किया था। इसके साथ ही वह मस्जिद में पेश इमामत भी करते रहे हैं।
शरीअत के प्रावधानों पर अमल करने पर वह हमेशा जोर देते रहे हैं। वर्ष 2007 में वह शहर काजी बने। ताजुश्शरीय बरेली शरीफ से उन्हें मान्यता मिली थी। उन्होंने अपने जीवन काल में कई दीनी इजलास किए। उनकी अंतिम यात्रा में हर वर्ग और संप्रदाय के लोग शामिल रहे।
उन्हें चाहने वाले फूट-फूटकर रोते रहे हैं। इस मौके पर शहर काजी मौलाना मुश्ताक मुशाहिदी, शहर काजी मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही, कारी सगीर आलम हबीबी, मुफ्ती मो. अकमल अशरफी, डॉ. तारिक मुस्तफा, अकीलुर्रहमान, महबूब आलम खान समेत पुलिस प्रशासन और राजनीतिक हल्को से जुड़े लोग शामिल रहे।