गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप के मामले में एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट (एडीजे प्रथम) के जज ने डाकू जियालाल कोल को सात साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही पांच हजार रुपये के अर्थदंड की भी सजा सुनाई है।
इस मामले में एसटीएफ ने थाना रैपुरा में डाकू ददुआ के पुत्र समेत दस अन्य को भी नामजद किया था। 15 सितंबर 2007 में एसटीएफ के तत्कालीन निरीक्षक अभय प्रताप ने रैपुरा थाने में कई मामलों की विवेचना के बाद गिरोह बंद एवं समाज विरोधी क्रिया कलाप (गैंगस्टर) की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।
अभियोजन अधिकारी सनद कुमार मिश्रा ने बताया कि जिसमें डाकू जियालाल कोल के अलावा डाकू शंकर कोल, गुड्डा उर्फ राजमन, डाकू ददुआ के पुत्र वीर सिंह, ददुआ के भाई बालकुमार, मुन्ना सिंह उर्फ अरुण सिंह, रमाशंकर पटेल, महेश पटेल, सोनू पटेल, कुलदीप, रामनारायण उर्फ सेठ, सरवन पटेल, सुलखान सिंह, रामलाल पटेल उर्फ आचार्य, राजू कोल, गिरजा शंकर मुंशी उर्फ गिरजाशरण, सूरजभान पटेल, सूबेदार उर्फ राधे पटेल और रघुनंदन पाठक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
इसी मामले में 29 फरवरी 2008 से जेल में बंद डाकू जियालाल कोल ने अपना जुर्म स्वीकार किया। शनिवार को दोनों पक्ष की सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट (एडीजे प्रथम) के जज रवींद्र कुमार श्रीवास्तव ने जियालाल कोल को सात साल कैद व पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। आदेश में यह भी कहा गया कि अभियुक्त जियालाल पहले से जेल में है इसलिए उसकी यह सजा पूर्व में जेल में बिताई गई अवधि में समायोजित होगी।