मां बोली- आंखें होती, तो बचा लेती लाल को
घर में ही संगीता के सामने बड़े पुत्र जैस की मौत पर वह अपनी किस्मत को कोसती हुई दहाड़े मारकर कह रही थी कि भगवान ने पहले उसकी आंखें छीन लीं और उसके सामने ही उसके पुत्र की मौत हो गई। वह बेबस व लाचार रहकर कुछ न कर सकी। वह बार-बार कर रही थी कि मेरे किस कसूर की सजा दी है।