रोजी रोटी की जुगाड़ में ओमान गए इंटीरियर डेकोरेटर को जान के लाले पड़ गए। ओमान पहुंचे शख्स की कुछ महीने पहले तबीयत खराब हो गई, लेकिन कंपनी ने उसे वापस भारत नहीं भेजा। पत्नी से कंपनी के बैंक खाते में तीस हजार रुपये भी जमा करा लिए, मगर युवक अब भी ओमान में फंसा है। इस मामले में युवक की पत्नी ने प्रदेश और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जानकारी दिल्ली स्थित ओमान के दूतावास को दी है।
कछौना कस्बे के पुरानी बाजार निवासी चंद्रशेखर सोनी (42) इंटीरियर डेकोरेटर है। उसकी पत्नी रचना सोनी के मुताबिक पिछले लगभग दस वर्ष से चंद्रशेखर अलग-अलग स्थानों पर नौकरी कर रहा है। पहले ओमान फिर मसकट और फिर दुबई में नौकरी कर चुका है। लगभग छह माह पहले चंद्रशेखर फिर से ओमान गया था।
पत्नी रचना का कहना है कि ओमान में चंद्रशेखर बीमार हो गया। दो माह पहले पति ने फोन पर उसे बीमार होने की जानकारी दी और कंपनी की ओर से चिकित्सा सुविधाएं न मिलने की बात कही। इलाज के लिए उसने बीस हजार रुपये खाते में भेजने की बात कही। लगभग एक माह पहले फिर से चंद्रशेखर ने पत्नी को फोन कर बताया कि तबीयत ज्यादा खराब है और घर वापस आना चाहता है, लेकिन कंपनी के मालिक उसका वीजा का रुपया बाकी होने के कारण पासपोर्ट नहीं दे रहा है।
पत्नी का दावा है कि कंपनी इस बार उससे मजदूरी भी करा रही है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी दूर करने में कोई प्रयास नहीं हो रहा। महिला और उसके दो बच्चों आरोही और अंश बेहद दुखी हैं। पूरा मामला संज्ञान में आने पर कछौना कोतवाली पुलिस महिला के पास पहुंची और पूरे प्रकरण की जानकारी ली। एसपी अजय कुमार ने बताया कि महिला के पति चंद्रशेखर को वापस लाने के लिए जिलाधिकारी के माध्यम से ओमान दूतावास को लिखा गया है। अन्य आवश्यक कार्यवाई भी की जा रही है।
दो वर्ष का वीजा है चंद्रशेखर के पास
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक चंद्रशेखर के पास ओमान में रहने के लिए दो वर्ष का वीजा है। उसका पासपोर्ट अपडेट है। परिजनों का भी दावा है कि उसके सारे अभिलेख पूर्ण हैं, लेकिन कंपनी मालिक ने पासपोर्ट अपने पास रख लिया है, इसलिए समस्या हो रही है।
राजस्थान के युवक के सहयोग से विदेश गया था चंद्रशेखर
चंद्रशेखर के कुछ परिजन नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि राजस्थान के एक युवक के सहयेाग से चंद्रशेखर विदेश गया था। कई वर्ष तक चंद्रशेखर ने विदेश में अच्छा काम भी किया, लेकिन इस बार चंद्रशेखर गलत कंपनी में फंस गया। इंटीरियर डेकोरेटर का काम देने के लिए उसे बुलाया गया था, लेकिन मजदूरी कराई जा रही है।
सोशल मीडिया पर भी शुरू हुई मुहिम
सोशल मीडिया पर भी चंद्रशेखर को वापस लाने की मुहिम चल निकली है। कई लोगों ने फेसबुक और ट्विटर के जरिए रचना सोनी की बात विदेश मंत्रालय और दूतावास तक पहुंचाने की कोशिश की है।