एसपी क्राइम राजेश के मुताबिक कमेटी की मीटिंग की पूरी वीडियोग्राफी कराई जाती है। जांच में वीडियोग्राफी भी देखी गई जिसमें डोनर और रिसीवर से कमेटी के सामने सवाल जवाब किए गए। हैरानी की बात ये है कि डॉक्टर दीपक ने ही सभी सवाल पूछे। अन्य सदस्य महज खानापूरी करते हुए बैठे रहे। इससे पुलिस का कहना है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित रहता था।
शुक्रवार को पुलिस ने पीएसआरआई हॉस्पिटल जाकर डॉक्टर दीपक से पूछताछ की थी। पूछताछ की बात कहकर ही उनको लेकर कानपुर आई। डॉक्टर दीपक का कहना था कि वह पुलिस की जांच में मदद करने के लिए आए हैं। शाम को पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी दिखाकर कोर्ट में पेश कर दिया।
बर्रा पुलिस ने 17 फरवरी को किडनी कांड का खुलासा किया था। अभी तक दस आरोपी जेल जा चुके हैं। इसमें पश्चिम बंगाल का टी राजकुमार, लखीमपुर का गौरव मिश्रा, जयपुर का शैलेश सक्सेना, लखनऊ का सबूर अहमद, विक्की और शमशाद अली के साथ श्याम तिवारी उर्फ श्याम मोहन, राजा उर्फ मोहम्मद उमर, रामू पांडेय, गुलाम जुनैद अहमद खान को जेल भेजा जा चुका है। मामले की जांच क्राइम ब्रंाच कर रही है।
दिसंबर 2018 में किदवई नगर निवासी संगीता नाम की महिला को नौकरी दिलाने का झांसा देकर इलाकाई निवासी श्याम तिवारी, कर्रही के मोहित निगम और हमीरपुर मौदहा के जुनैद दिल्ली ले गए थ। यहां पर अपने साथी पश्चिम बंगाल निवासी टी राजकुमार, लखीमपुर निवासी गौरव मिश्रा के साथ मिलकर उसकी किडनी का सौदा कर दिया। भनक लगने के बाद संगीता भागकर कानपुर आई थी। 29 जनवरी को उन्होंने बर्रा थाने में एफआईआर दर्ज करवाई थी। उसके बाद पुलिस ने स्टिंग कर आरोपियों को गिरफ्तार किया।