डीपीआरओ की जांच रिपोर्ट में तीन लोग जिंदा मिले हैं। इसमें सबसे बड़ा दोषी सत्यापन करने वाला सचिव है। उसने बिना मौके पर जाए मृत दिखा दिया। गलत सत्यापन करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। -त्रिनेत्र सिंह, समाज कल्याण अधिकारी
कागजों में मृत रईश घर में खाते मिले खाना
ककवन ब्लॉक के औरोतहारपुर गांव के रहने वाले मो. रईश पुत्र शहजादे के घर टीम जांच करने पहुंची। पता चला कि वे घर में खाना खा रहे हैं। उनको जिंदा देखकर टीम हैरान रह गई। हैरान रईश भी हुए जब बताया गया कि वे कागजों में मृत घोषित किए जा चुके हैं। 77 वर्षीय रईश ने बताया कि 10 साल से पेंशन मिल रही थी, लेकिन जनवरी के बाद से नहीं आई। कई बार ब्लाॅक भी गए लेकिन सही जानकारी नहीं मिल सकी। टीम ने उनका आधार चेक किया तो सही पाया।
घर के बाहर बैठीं मिलीं माया देवी
इसके बाद टीम जमालपुर गांव में मायादेवी पत्नी धनीराम के घर पहुंची। माया देवी घर के दरवाजे पर बैठीं मिलीं। टीम ने उनके बारे में पूछा तो पता चला कि यही माया है। उन्हें बताया गया कि आपको मृत घोषित कर दिया गया है, तो 75 वर्षीय माया हैरान रह गईं। इसके बाद वो अपना आधार लेकर आईं। इसके बाद टीम ने उन्हें सही माना।
माया बोलीं, कोई नहीं आया सत्यापन करने
इसी तरह शाहपुर गांव की रहने वाली माया देवी पत्नी रामदास के घर टीम पहुंची, तो वे भी जिंदा मिलीं। 69 वर्षीय माया ने कहा आज तक कोई सत्यापन करने घर नहीं आया। कई बार ब्लॉ जाकर पेंशन न आने का कारण पूछा तो कोई सही जानकारी ही नहीं मिली।