जावित्री ने खुद पुलिस से संपर्क किया या उसे पुलिस तलाश कर लाई, यह स्पष्ट नहीं हो रहा है। पुलिस को जानकारी देने में बसपा नेता का नाम सामने आया है। उन्होंने थाने में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस को जावित्री के अलीगढ़ में होने की बात बताई थी।
इसके बाद ही हरकत में आई पुलिस उसे लेने के लिए रवाना हुई। बसपा कोआर्डिनेटर और पालिका चेयरमैन प्रतिनिधि जगजीवन अहिरवार ने बताया कि करीब तीन दिन पहले उनके व्हाट्स एप पर एक सूचना आई।
इसमें किसी महिला की ओर से अपना नाम जावित्री पुत्री रामप्रकाश बताते हुए लिखा गया कि वह कालपी की रहने वाली है। माता पिता, भाई बहन के नाम भी लिखे। संदेश में बताया कि वह करीब 12 साल पहले दिल्ली में दादा-दादी के साथ गई थी।
यहां वह उनसे बिछड़ गई थी। जावित्री ने मैसेज में घरवालों से बात कराने की बात भी लिखी थी। बसपा नेता के मुताबिक उन्होंने उस नंबर पर बात की तो वह किसी सुरेंद्र का नंबर निकला। सुरेंद्र ने जावित्री से उनकी वीडियो कॉल पर बात कराई।
इस पर जावित्री ने उन्हें पहचान लिया। जगजीवन के मुताबिक जावित्री दूर के रिश्ते में उनकी बहन लगती है। वह उसे नहीं पहचान पाए। जावित्री ने दावा किया तो उन्होंने पूरी जानकारी कोतवाली पुलिस को प्रार्थना पत्र के माध्यम से दी।
जावित्री मामला सालों पहले चर्चित हो चुका था। इससे हरकत में आई पुलिस उसे लेने के लिए निकल पड़ी। इस संदर्भ में कालपी कोतवाल शिव गोपाल का कहना है कि यह सही है कि बसपा नेता ने प्रार्थना पत्र दिया था। पुलिस को मामले की जानकारी पहले से भी हो गई थी।
सिपाही के जरिए मिला नेता का नंबर
बसपा नेता जगजीवन ने बताया कि अलीगढ़ के थाना क्षेत्र छर्रा में जावित्री अपने परिवार के साथ रहती है। वहां थाने में एक सिपाही कालपी का रहने वाला है। सुरेंद्र नामक युवक उसी क्षेत्र का सभासद भी बताया जाता है, उसका उस घर में आना जाना है, जिनके यहां जावित्री का पति वीरेंद्र पुत्र रामवीर राज मिस्त्री का काम कर रहा है।
पति की चर्चा से ही बात सुरेंद्र तक पहुंची। सुरेंद्र ने सिपाही के माध्यम से कालपी में जावित्री के परिजनों तक पहुंचने का प्रयास करते हुए उनका नंबर पा लिया। इसके बाद सुरेंद्र ने जावित्री का संदेश अपने नंबर से उन तक भेजा।
घर के पते पर चिट्ठी आने की भी चर्चा
बसपा नेता के प्रार्थना पत्र के अलावा अनीता के नाम से कालपी के पते पर चिट्ठी आने की भी चर्चा है। इसमें राम प्रकाश पत्नी रज्जो को संबोधित करते हुए लिखा गया है कि उनकी बेटी 2007 में दिल्ली में उनसे बिछड़ गई थी। वह उनसे मिलने के लिए रोती है। अगर मिलना हो तो संबंधित मोबाइल नंबर पर संपर्क करें। वहीं दूसरी ओर रज्जो देवी का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई चिट्ठी नहीं आई है।