जावित्री मामले में रज्जो के बयान के बाद डीएनए टेस्ट की संभावना बढ़ गई है। अब डीएनए टेस्ट से साबित हो सकेगा कि जावित्री और रज्जो मां-बेटी हैं या नहीं। इस बारे में एसपी यशवीर सिंह का कहना है कि रज्जो आखिरी तक जावित्री को बेटी मानने से इनकार करती हैं तो सीबीसीआईडी डीएनए टेस्ट करा सकती है।
इससे सच्चाई सामने आ जाएगी। रज्जो की ओर से पुलिस पर लगाए गए आरोपों की हकीकत भी डीएनए टेस्ट में सामने आ जाएगी। जावित्री के रज्जो को बेटी मानने से इनकार के मामले में एसपी का कहना है कि पहले जावित्री के 164 के बयान होंगे।
इसके बाद भी रज्जो उसे बेटी मानने से इनकार करती हैं तो दोनों के बीच रिश्ता साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट ही इकलौता विकल्प है। केस के मुताबिक किशोरी के अपहरण और बाद में एक शव की शिनाख्त जावित्री के रूप में की गई थी। उस वक्त का ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जिससे दोनों का रिश्ता साबित हो सके। इससे डीएनए टेस्ट जरूरी हो जाएगा।
नहीं आई सीबीसीआईडी, लौट गई जावित्री
गुरुवार दोपहर तक पुलिस अधिकारी सीबीसीआईडी के आने का इंतजार करते रहे। शाम को बताया गया कि फिलहाल कोई टीम नहीं आएगी। इस पर जावित्री को उसके घरवालों के साथ अलीगढ़ भेज दिया गया। सीओ कालपी आरपी सिंह ने बताया कि दो तीन-दिन बाद ही सीबीसीआईडी के आने की संभावना है। जब टीम आएगी तो जावित्री को बुलाकर कोर्ट में बयान कराए जाएंगे।
ये हैै मामला
नई बस्ती रामचबूतरा मोहल्ले में अनुसूचित जाति की जावित्री पुत्री रामप्रकाश के अपहरण व हत्या के मामले की शुरुआत खड़ंजा विवाद से हुई थी। इलाकाई लोगों के मुताबिक पहले के बिछे खड़ंजे की पुरानी ईंटों को ले जाने की बात पर पालिका के तत्कालीन अवर अभियंता नानक चंद्र से जावित्री के परिजनों का विवाद हो गया था।
इसके कुछ दिन बाद नाटकीय तरीके से जावित्री गायब हो गई। जावित्री की मां रज्जो की तहरीर पर अवर अभियंता नानकचंद्र, ठेकेदार अनीस, हरीबाबू गुप्ता तत्कालीन भाजपा सभासद, चंद्रप्रकाश विश्नोई ठेकेदार, तत्कालीन बसपा सभासद इशहाक खान, मोहल्ले की राजकुमारी, रेहाना समेत 10 लोगों पर 2008 में बहला फुसलाकर जावित्री को ले जाने का मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद 2009 में रज्जो ने घाटमपुर में मिली किशोरी के शव की शिनाख्त कर ली। अब रज्जो के जिंदा मिलने से हड़कंप मचा है।