ब्लैक फंगस में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन की जगह पर नकली इंजेक्शन बेचने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें भाजपा नेता व दवा कारोबारियों समेत कुल पांच आरोपी हैं। पुलिस की जांच में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जिनसे साबित होता है कि महामारी के दौरान नकली इंजेक्शनों की खेप शहरों में खपाई गई।
पुलिस मुख्य आरोपी ज्ञानेश पर रासुका भी लगा चुकी है। 27 मई को ग्वालटोली पुलिस ने भाजपा नेता प्रकाश मिश्रा और दवा कंपनियों में अफसर के पद पर रहे निराला नगर निवासी ज्ञानेश शर्मा को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 68 नकली इंजेक्शन बरामद हुए थे।
इसके बाद पुलिस ने प्रयागराज से मेडिकल स्टोर संचालक पंकज कुमार और मधुरम अग्रवाल की गिरफ्तारी की। आखिर में लखनऊ से मेडिकल स्टोर मालिक विजय मौर्या को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोप था कि आरोपी नकली इंजेक्शन दस से पंद्रह हजार रुपये में अस्पतालों व तीमारदारों को बेचते थे। एसीपी कर्नलगंज त्रिपुरारी पांडेय ने बताया कि पांचों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। सभी के खिलाफ सुबूत हैं। जिसके आधार पर आरोप तय किए गए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अहम, सीडीआर ने की पुष्टि
एसीपी ने बताया कि आरोपियों के व्हाट्सएप से तमाम ऐसी चैट मिली है जिसमें इंजेक्शन सप्लाई करने की बातचीत है। यहां तक कि पैसों का भी लेनदेन उसमें दर्ज है। ये इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बेहद अहम हैं। आरोपियों की आपसी बातचीत की पुष्टि मोबाइल नंबरों की सीडीआर से हुई है। इसके अलावा बरामद इंजेक्शन की फोरेंसिक रिपोर्ट में नकली पाए गए थे। इसकी रिपोर्ट भी पुलिस ने चार्जशीट में शामिल की है।