कैंसर लाइलाज नहीं रहा है। पहले ब्लड कैंसर (क्रॉनिक माइलॉयड ल्यूकीमिया, सीएमएल) होने के बाद औसत जीवन सिर्फ दो से तीन साल होता था लेकिन अब इलाज से इस पर विजय पा ली गई है। पीड़ित मरीजों की औसत आयु इलाज के बाद 25 साल बढ़ चुकी है। यह कैंसर पुरुषों में ज्यादा पाया जाता है।
देश में हर साल 32532 लोग इससे पीड़ित होते हैं। यह कहना है केजीएमयू लखनऊ के हीमैटोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके त्रिपाठी का। डॉ. त्रिपाठी शुक्रवार को जेके कैंसर के स्थापना दिवस पर सीएमएल विषय पर संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कमजोरी, भूख न लगना, पेट हमेशा भारी रहना, पेट में असामान्य तनाव व सूजन या तिल्ली बढ़ना, वजन में कमी होना, माहवारी का अनियमित होना, त्वचा में लाल या नीले चकत्ते पड़ना, हड्डियों में दर्द होना सीएमएल के लक्षण होते हैं।
जेके कैंसर के डायरेक्टर डॉ. एमपी मिश्र ने बताया कि सीएमएल की दवा ‘इमेटिनिब’ का सेवन कर मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। यह दवा संस्थान में मुफ्त मिलती है। डॉ. मिश्र ने जेके ग्रुप के प्रति आभार भी जताया।