100 क्विंटल गोबर पर 1200 रुपये शुल्क
विचार-विमर्श के बाद महापौर ने जोनल स्वच्छता अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे चट्टा संचालकों के गोबर एकत्रित कर निस्तारित करें। चट्टा संचालकों से 100 क्विंटल गोबर पर 1200 रुपये शुल्क लिया जाए. जिस चट्टे से जितना गोबर मिले, उसी हिसाब से उनसे शुल्क वसूला जाएगा। यह व्यवस्था छह महीने के लिए लागू की जा रही है।
वह स्थायी चट्टे बनाने के लिए शासन में बात करेंगी महापौर
इस दौरान यदि चट्टों के आसपास गोबर मिले या वे सीवर लाइनों में गोबर बहाएं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। चट्टा संचालकों को आश्वासन दिया कि वह स्थायी चट्टे बनाने के लिए शासन में बात करेंगी। बैठक में अपर नगर आयुक्त (प्रथम) प्रतिपाल सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके निरंजन, रफजुल रहमान आदि शामिल रहे।
चट्टों से नाली में गोबर जाने से रोकने के लिए आईआईटी से मांगा सहयोग
महापौर के अनुसार, चट्टों से गोबर नालियों में न जाए, इसके लिए आईआईटी से तकनीकी सहयोग लिया जाएगा। इसके लिए 18 या 19 नवंबर को आईआईटी के साथ बैठक करने के निर्देश दिए।