कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में सत्र 2027-28 से नए कोर्स बीटेक केमिकल विद स्पेशलाइजेशन एआई-एमएल की शुरुआत होगी। सोमवार को हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में नए कोर्स को मंजूरी दी गई। 60 सीटों वाले इस कोर्स में जेईई मेन की रैंक के आधार पर प्रवेश होगा। एचबीटीयू का दावा है कि उत्तर प्रदेश में इस तरह का कोर्स शुरू करने वाला यह पहला संस्थान होगा।
कुलपति प्रो. समशेर की अध्यक्षता में हुई बैठक में नए कोर्स की उपयोगिता को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. जीएल देवनानी ने कहा कि इंडियन ऑयल, गेल, यूएई की एडीएनओसी सहित कई इंडस्ट्री से कोर्स के बारे में फीडबैक लिया गया। सभी ने इस कोर्स की जरूरत पर मुहर लगाई। इंडस्ट्री की ओर से ऐसे इंजीनियरों की जरूरत बताई गई जिन्हें केमिकल इंजीनियरिंग के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की जानकारी हो।
प्रो. देवनानी के अनुसार, अभी आईआईटी मंडी, आईआईटी खड़गपुर और आईआईटी हैदराबाद में केमिकल इंजीनियरिंग से जुड़े एआई-एमएल आधारित पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं। एचबीटीयू का नया कोर्स छात्रों को केमिकल इंजीनियरिंग और डिजिटल तकनीक के बीच काम करने के लिए तैयार करेगा। इंडस्ट्री के महत्वपूर्ण डाटा की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है। नए कोर्स में छात्रों को डाटा एनालिसिस के साथ साइबर सिक्योरिटी और एआई आधारित तकनीकों की समझ भी विकसित करने का अवसर मिलेगा। इससे कंपनियों को ऐसे इंजीनियर मिल सकेंगे जो उत्पादन तकनीक और डिजिटल सिस्टम दोनों को समझते हों।
ये होंगे लाभ
केमिकल इंडस्ट्री में उत्पादन प्रक्रिया से बड़ी मात्रा में डाटा तैयार होता है। तापमान, दबाव, रसायनों की मात्रा, मशीनों की स्थिति और उत्पादन की गुणवत्ता जैसे कई मानकों की लगातार निगरानी करनी होती है। एआई और मशीन लर्निंग की मदद से इस डाटा का विश्लेषण कर उत्पादन प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों का पहले पता लगाया जा सकेगा। इससे मशीनों के अचानक खराब होने और उत्पादन रुकने की स्थिति को कम करने में मदद मिल सकती है।
छात्रों के लिए बढ़ेंगे कॅरिअर के विकल्प
कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों के लिए केमिकल इंजीनियरिंग के साथ एआई, मशीन लर्निंग, डाटा एनालिटिक्स और इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में अवसर बनेंगे। पेट्रोकेमिकल, रिफाइनरी, गैस, फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में एआई आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में ऐसे इंजीनियरों की मांग बढ़ने की संभावना है।