इस दौरान आजाद की तबीयत खराब हुई, तो वह अपने गांव के लिए ट्रेन में बैठकर कानपुर के लिए निकला, लेकिन तबीयत खराब होने पर मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह राजस्थान के जयपुर पहुंच गया। बीमार स्थिति में उसकी जयपुर शहर में एक व्यक्ति से मुलाकत हुई।
आजाद की बहन इंस्टाग्राम पर रील देख रही थी
उसकी मदद से ठीक होने के बाद जयपुर में ही नौकरी करने लगा। इस दौरान 18 साल बीत गए और युवक का परिजनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया। आजाद अपना गांव घर भी भूल चुका था। कुछ दिन पूर्व कानपुर नगर के हाथीपुर गांव की रहने वाली आजाद की बहन राजकुमारी इंस्टाग्राम पर रील देख रही थी।
बचपन में टूटे भाई के दांत देखकर पहचाना
इस दौरान उसने अपने भाई की रील देखी, तो बचपन में टूटे भाई के दांत देखकर पहचान लिया। बहन ने मैसेज के माध्यम से आजाद से संपर्क किया और मोबाइल फोन पर बातचीत होने पर उसका शक यकीन में बदल गया। इसके बाद बहन जयपुर पहुंची और 27 जून को अपने भाई को लेकर गांव आ गई।
बेटे का रोली टीका लगाकर स्वागत किया
आजाद के पिता सांवली पासवान और मां रामकली ने 18 साल से पहले बिछड़े बेटे को देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे का रोली टीका लगाकर स्वागत किया। आजाद के परिवार में मां बाप के अलावा दो छोटे भाई धीरज, मनीष, चार बहने रेखा सुलेखा राजकुमारी और अर्चना हैं।
जयपुर में ही शादी कर आजाद ने बसा लिया परिवार
जयपुर में नौकरी के दौरान आजाद जब ठीक-ठाक कमाने लगा, तो उसने वहीं पर ईश्वर देवी नाम की लड़की से शादी कर घर बसा लिया। वर्तमान में आजाद की पत्नी से एक बेटा और बेटी है। इसी बीच युवक को रील बनाने का भी शौक हो गया। यही शौक उसके बिछड़े परिवार से मिलने का माध्यम बना।