फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: रील्स से मिले 18 साल पहले बिछड़े भाई-बहन, 16 वर्ष की उम्र में आजाद छोड़कर गया था घर, परिजनों से कही ये बात

Tue, 02 Jul 2024 11:56 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर

सार

Fatehpur News: बिंदकी कोतवाली क्षेत्र में इंस्टाग्राम रील्स ने 18 साल पहले बिछड़े भाई-बहन को मिला दिया। बहन ने रील्स में भाई के टूटे दांत देखकर पहचाना, जो 16 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर गया था। परिवार ने बिछड़े बेटे को देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे का रोली टीका लगाकर स्वागत किया।
विज्ञापन
घर में मौजूद आजाद के परिजन और आजाद - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फतेहपुर जिले  के बिंदकी में इंस्टाग्राम रील देख रही बहन ने 18 साल पहले बिछड़े भाई की रील देखकर पहचान लिया। मैसेज के माध्यम से भाई से संपर्क किया और उसे जयपुर से वापस घर ले आई। बिछड़े बेटे से मिलकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है।

विज्ञापन

मालवां थाना क्षेत्र के दुइजा का पुरवा निवासी सांवली पासवान का बेटा आजाद उर्फ गोविंद (34) 18 साल पहले 16 वर्ष की आयु में कमाने मुंबई चला गया था। मुंबई पहुंचने पर उसका संपर्क दोस्तों और परिजनों से टूट गया और वह लापता हो गया। कुछ समय बाद उसके साथी भी वापस गांव आ गए।

इस दौरान आजाद की तबीयत खराब हुई, तो वह अपने गांव के लिए ट्रेन में बैठकर कानपुर के लिए निकला, लेकिन तबीयत खराब होने पर मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह राजस्थान के जयपुर पहुंच गया। बीमार स्थिति में उसकी जयपुर शहर में एक व्यक्ति से मुलाकत हुई।

आजाद की बहन इंस्टाग्राम पर रील देख रही थी
उसकी मदद से ठीक होने के बाद जयपुर में ही नौकरी करने लगा। इस दौरान 18 साल बीत गए और युवक का परिजनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया। आजाद अपना गांव घर भी भूल चुका था। कुछ दिन पूर्व कानपुर नगर के हाथीपुर गांव की रहने वाली आजाद की बहन राजकुमारी इंस्टाग्राम पर रील देख रही थी।

बचपन में टूटे भाई के दांत देखकर पहचाना
इस दौरान उसने अपने भाई की रील देखी, तो बचपन में टूटे भाई के दांत देखकर पहचान लिया। बहन ने मैसेज के माध्यम से आजाद से संपर्क किया और मोबाइल फोन पर बातचीत होने पर उसका शक यकीन में बदल गया। इसके बाद बहन जयपुर पहुंची और 27 जून को अपने भाई को लेकर गांव आ गई।

बेटे का रोली टीका लगाकर स्वागत किया
आजाद के पिता सांवली पासवान और मां रामकली ने 18 साल से पहले बिछड़े बेटे को देखा, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटे का रोली टीका लगाकर स्वागत किया। आजाद के परिवार में मां बाप के अलावा दो छोटे भाई धीरज, मनीष, चार बहने रेखा सुलेखा राजकुमारी और अर्चना हैं।
विज्ञापन

जयपुर में ही शादी कर आजाद ने बसा लिया परिवार
जयपुर में नौकरी के दौरान आजाद जब ठीक-ठाक कमाने लगा, तो उसने वहीं पर ईश्वर देवी नाम की लड़की से शादी कर घर बसा लिया। वर्तमान में आजाद की पत्नी से एक बेटा और बेटी है। इसी बीच युवक को रील बनाने का भी शौक हो गया। यही शौक उसके बिछड़े परिवार से मिलने का माध्यम बना।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें