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पानी से भरे गड्ढों में डूबकर भाई-बहन की मौत

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इटावा जिले के भरथना थाना क्षेत्र नगला पछाय गांव में हादसे के बाद रोते बिलखते बच्चों के परिवार और ? - फोटो : ETAWHA
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भरथना (इटावा)। निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर पानी से भरे गड्ढे में डूबकर मासूम भाई बहन की मौत हो गई। थाना क्षेत्र अंतर्गत नगला पछाय गांव निवासी श्यामसुंदर पुत्र शोभाराम के दो बच्चे डॉली (12) व अंकित (6) शनिवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे गांव के अन्य बच्चों के साथ बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की ओर खेलने चले आए। इसी बीच इस निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे के किनारे पर पानी से गड्ढे में डॉली व अंकित गिर गए। साथ मौजूद बच्चों ने गांव में जाकर इसकी सूचना दी। गांव के अवधेश व ब्रजेंद्र आदि ग्रामीण आनन-फानन में मौके पर पहुंचे और गड्ढे में छलांग लगा दी लेकिन तब तक देर चुकी थी। दोनों बच्चों की जान चली गई थी। मृतक बच्चों के पिता श्यामसुंदर गांव में मौजूद नहीं थे। वह अपनी पत्नी का इलाज कराने के लिए 5 मार्च से इटावा गए हुए हैं। परिवार के रामवीर ने बताया कि बच्चों के पिता को घटना की सूचना दे दी है।
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दो बच्चों की मौत की जानकारी मिलने पर एसडीएम इंद्रजीत सिंह, तहसीलदार नंद प्रकाश मौर्य, कोतवाल बलिराज शाही आदि पुलिस बल मौके पर पहुंचे और पूछताछ की।
अस्पताल में भर्ती मां को नहीं दी बच्चों की मौत की खबर
भरथना। डॉली और अंकित की मां विमला देवी के पेट में गांठ थी। पांच मार्च को उनका इटावा शहर के प्राइवेट अस्पताल में ऑपरेशन हुआ था। अस्पताल में भर्ती विमला की देखरेख के लिए पति श्याम सुंदर अस्पताल में ही थे। शाम करीब चार बजे उनको बच्चों की मौत की खबर मिली। श्याम सुंदर ने बीमार पत्नी को बच्चों की मौत होने की भनक नहीं लगने दी। जरूरी काम से घर जाने की बात विमला से कहकर श्याम सुंदर गांव पहुंच गए। मजूदरी कर परिवार चलाने वाली श्याम सुंदर ने बताया कि उनके छह बच्चे थे। इसमें बड़ी बेटी वंदना की दो साल पहले शादी कर चुके हैं। दूसरी नंबर की बेटी डॉली (12) और चौथे नंबर का बेटा अंकित (6) था। सुमित (10), पंकज (5) और लल्ला (2) तीन और बेटे हैं।
गड्ढे के आसपास नहीं लगे संकेतक
गांव के जयवीर, आदेश कुमार, अवधेश कुमार, कल्लू, ब्रजेन्द्र कुमार, राकेश, विनय, सौरभ, बंटी, प्रकाश, छोटेलाल, राहुल बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे में अंदरपास बनाने के लिए ठेकेदार ने गहरा गड्ढा खोदा है। बारिश होने से गड्ढे में पानी भर गया है। ऊपर तक पानी भरने से गड्डा होने का पता नहीं लग पाया। गड्ढे के चारों ओर ठेकेदार ने सुरक्षा जाली या झंडी नहीं लगाई। अगर सुरक्षा जाली या झंडी लगी होती तो बच्चे गड्ढे के पास नहीं जाते।
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