कानपुर में पड़ोसियों को फंसाने के लिए बॉक्सर बेटे ने पुजारी पिता की हत्या कर दी। आरोपी ने 25 लाख का लालच देकर फुफेरे भाई को भी हत्याकांड में शामिल किया। बेटे के हाथ की फॉरेंसिक जांच में बारूद की पुष्टि हुई थी। फुफेरे भाई ने तमंचा लाकर दिया था। हत्या के आरोपी जेल भेज दिए गए हैं।
कानपुर के आनंदेश्वर मंदिर परिसर में मंदिर के सेवादार कन्हैया लाल कश्यप की हत्या उनके राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर बेटे संदीप ने ही महज पड़ोसियों को फंसाने के लिए की थी। संदीप ने अपने फुफेरे भाई उन्नाव के सफीपुर निवासी अजय कश्यप को भी 25 लाख रुपये देने का लालच देकर इस हत्याकांड में शामिल किया।
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पिता की हत्या के बाद खुद ही वादी बनकर पड़ोसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी। शुक्रवार को पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया। डीपीसी सेंट्रल प्रमोद कुमार ने अपने कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि ग्वालटोली थाना क्षेत्र के परमट स्थित आनंदेश्वर मंदिर परिसर में रहने वाले सेवादार कन्हैया लाल कश्यप (56) की मंगलवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
शव घर के पास मिला था। मृतक के बेटे संदीप ने पड़ोसी श्यामनारायण बाजपेई, उसके दो बेटों व पड़ोसी एक अन्य महिला पर रंजिश में हत्या करने का आरोप लगा रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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डीसीपी के मुताबिक जब परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे और सर्विलांस टीम की मदद से जांच शुरू की गई तो मामला संदिग्ध निकला।
फुटेज में वारदात की रात मृतक के ही बेटे की चहलकदमी मिली। वहीं, सर्विलांस की मदद से पता चला कि मृतक का बेटा संदीप व उसका फुफेरे भाई अजय कश्यप कन्हैया लाल की हत्या के पहले और बाद में लगातार मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क में थे। संदीप को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने पिता की गोली मारकर हत्या करने की बात कुबूली।
संदीप के हाथों की फॉरेंसिक जांच हुई तो हाथों में बारूद की भी पुष्टि हुई। संदीप ने अपने फुफेरे भाई अजय कश्यप को भी रुपयों का लालच देकर हत्या में शामिल कर लिया। अजय ने ही वारदात में प्रयुक्त तमंचा व कारतूस मुहैया कराया, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया।
बदला और मुआवजे के लालच में रची साजिश
संदीप ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसका पूरा परिवार मांस, मदिरा का सेवन करता था। पड़ोसी श्याम बाजपेई, उसका परिवार और पड़ोस के कुछ अन्य लोग भी इसका विरोध करते थे। वहीं, घर के सामने पड़ी जमीन पर कब्जे को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद था। ढाई साल पहले श्याम बाजपेई की बहू की मौत के बाद पुलिस ने उसे दहेज हत्या में जेल भेज दिया था।
वह दो माह पहले छूटकर आया तो संदीप से दोबारा विवाद शुरू हो गया। वहीं, गंगा के पास कॉरीडोर बनना है। संदीप को उम्मीद थी कि मुआवजे के रूप में उसके पिता को सरकार डेढ़ करोड़ रुपये देगी, जो पिता के जिंदा रहते हुए उसे नहीं मिलता। तब संदीप ने पड़ोसियों से बदला लेने और मुआवजे के लालच में पिता की हत्या की साजिश रची।
शिक्षिका की हत्या में भी जा चुका जेल
पुलिस के अनुसार संदीप अपराधी प्रवृत्ति का है। वर्ष 2012 में उसने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर महाराजपुर में सरकारी स्कूल की शिक्षिका की कार में गला रेतकर हत्या कर दी थी। संदीप का दोस्त शिक्षिका की कार चलाता था। लूट के इरादे से वारदात को अंजाम दिया गया था। मामले में संदीप को जेल भेजा गया था।
हत्यारोपियों तक यूं पहुंची पुलिस
पुलिस के मुताबिक वारदात की रात संदीप ने अजय से फोन पर कोई बात नहीं की। प्लान के तहत अपना मोबाइल फोन बंद करके वह अजय को लेने उसके घर गया। रात करीब 11 बजे लौटा और बाइक घर से दूर यूनियन बैंक तिराहे पर खड़ी कर दी। दोनों मंदिर परिसर स्थित घर में जाते फुटेज में दिखे।
संदीप अकेला निकल कर घटना स्थल की ओर जाते दिखा। देर रात 1:40 बजे फिर घर के अंदर गया। इसके बाद अजय घर के निकलकर घटनास्थल पर जाता दिखा। मृतक के सिर से पार हुई बुलेट को खोजकर अजय ने वहीं छिपा दी। फिर गंगा के किनारे से होता हुआ बाइक के पास पहुंचा और उसी से अपने घर चला गया।