कमरे में वह अक्सर आने-जाने लगा
रिंकी के घर के ठीक सामने स्थित इस कमरे में वह अक्सर आने-जाने लगा और रिंकी पर मिलने और साथ रहने का दबाव बनाने लगा, लेकिन रिंकी राजी नहीं हुई। शनिवार रात अनिल इसी कमरे में रुका था। सुबह उसके पति राम सिंह के घर से जाने का इंतजार करने लगा। सुबह जैसे ही राम सिंह घर के बाहर बने शौचालय में शौच के लिए गया।
गर्दन पर ताबड़तोड़ छह वार और कोहनी के पास एक वार
अनिल उसके घर में घुस गया और रिंकी से मारपीट करते हुए कुल्हाड़ी से उसकी गर्दन पर बाएं तरफ ताबड़तोड़ छह वार और बाएं हाथ की कोहनी के पास एक वार किया। इससे उसकी मौत हो गई। घटना के समय घर में मौजूद 11 साल का बेटा आयुष चीखा तो राम सिंह भागकर पहुंचा। इससे हत्यारोपी को भागने का मौका नहीं मिला वह वहीं एक कमरे में छिप गया।
हत्यारोपी को गिरफ्तार कर कुल्हाड़ी भी बरामद की
राम सिंह ने कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर लिया और पुलिस को घटना की जानकारी दी। कोतवाली प्रभारी श्याम नारायण सिंह फोर्स के साथ पहुंचे और मामले की जांच की। हत्यारोपी को गिरफ्तार करते हुए कुल्हाड़ी भी बरामद की। मृतका की बड़ी बेटी अंशिका का विवाह हो चुका है। बड़ा बेटा रवि मुंबई में और छोटा आयुष यहां पिता के साथ रहता है।
भागता नहीं तो बेटे को भी मार डालता
घटना के समय घर में मौजूद 11 साल के बेटे आयुष ने मां को बचाने का पूरा प्रयास किया। इससे उसे भी चोटें आईं। आयुष उर्फ तरुण ने बताया कि उसने, अनिल से मां को छोड़ देने की बात कही लेकिन जब वह वार करने लगा तो मां को खींचने और अनिल को धक्का देने की कोशिश की लेकिन वह मां को बचा न सका। इसके बाद हत्यारोपी उसे भी मारने दौड़ा, वह घर के बाहर न भाग जाता तो अनिल उसे भी जान से मार देता। अपनी आखों के सामने मां की हत्या की घटना से आयुष सहम गया है।
प्रेम-प्रसंग के साथ रुपयों का लेनदेन भी वजह
पूछताछ में हत्यारोपी अनिल ने पुलिस को बताया कि तीन साल पहले जब रिंकी उसके साथ जाने को राजी हुई तब उसने पैसों के लिए अपनी जमीन बेची थी। उसका एक लाख तीन हजार रुपये उसने रिंकी को रखने को दिया था लेकिन जब वह अपने पति के साथ चली गई, तो पैसों की मांग कर रहा था। रिंकी उसके पैसे नहीं लौटाना चाहती थी। उसने मिलना तो दूर बात तक करना बंद कर दिया था।
हत्यारोपी तीन महिलाओं से कर चुका था विवाह
हत्यारोपी अनिल ने पुलिस को बताया कि उसने तीन विवाह किए लेकिन कुछ दिन बाद सभी उसे छोड़कर चली गईं। उसके बाद पड़ोसी रिंकी उसके संपर्क में आई। वह साथ जाने को राजी हुई तो उसे लेकर पहले लखनऊ, फिर दिल्ली गया। वहां काम न मिलने पर उन्नाव आकर रहने लगा। रिंकी ने फैक्टरी में मजदूरी की और हत्यारोपी फल का ठेला लगाकर जीवन यापन करने लगा।