उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार को बने अभी दो सप्ताह तक पूरे नहीं हुए कि उनके कैबिनेट स्तर के मंत्रियों में खींचतान शुरू हो गई है। गजब की बात ये है कि ये दोनों नेता एक ही शहर के हैं। इस वजह से भी दोनों के बीच जारी यह लड़ाई ज्यादा रंग पकड़ती जा रही है।
शनिवार को यह दोनों नेता कानपुर पहुंचे जहां दोनों का जबरदस्त स्वागत किया गया। इसके बाद दोनों नेताओं ने शहर में अलग-अलग जुलूस निकाला। इस माध्यम से दोनों ने शक्तिप्रदर्शन किया। जुलूस में हजारों की तादात में भीड़ जुटी थी।
आपकी जानकीर के लिए बता दें प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने शहर लौटे सत्यदेव पचौरी का समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। मंत्री का काफिला लखनऊ से चलकर करीब चार बजे गंगा बैराज पहुंचा।
जहां पर पहले से ही काफी संख्या में लोग फूल मालाएं लेकर मौजूद थे। यहां से इनका काफिला कंपनी बाग, रावतपुर, गोल चौराहा, मेडिकल कॉलेज, मोतीझील, चुन्नीगंज चौराहा, लाल इमली होते हुए नवीन मार्केट पहुंचा।
वहीं कैबिनेट मंत्री सतीश महाना का जूलुस भी दमदार तरीके से निकला गया। दोनों के बीच टकराव जैसी स्थिति नजर आ रही है। दरअसल सतीश महाना पहले भी राज्य सरकार में मंत्री पद पर रह चुके हैं तो वही पचौरी को यह मौका पहली बार नसीब हुआ है।
फिलहाल, शनिवार को सारे दिन शहर में एक ही चर्चा रही कि दो कैबिनेट मंत्री सतीश महाना और पचौरी में से किसका स्वागत जुलूस बड़ा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी यह चर्चा चली। इस अवसर पर सुरेंद्र मैथानी, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, जगतवीर सिंह द्रोण, नीलिमा कटियार, सलिल विश्नोई, सुरेश अवस्थी, पप्पी पाण्डेय, अरविंद अग्निहोत्री, जगदीश तिवारी, अब्दुल सलाम जाफरी,रामदास निषाद, घनश्याम गुप्ता, सत्येंद्र मिश्रा, अनूप अवस्थी, सरन तिवारी, सुबोध तिवारी, उत्कर्ष, अनूप तिवारी, अजय, अचल, मनोज राठौर, विजय मिश्रा सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कलराज और पचौरी को एक ही मंत्रालय मिलने पर चर्चा
पहली बार प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने सत्यदेव पचौरी को मिले मंत्रालय को लेकर शहर में काफी चर्चा है। उन्हें रेशम, खादी और एक्सपोर्ट के अलावा जो सबसे महत्वपूर्ण विभाग मिला है उसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) भी शामिल है। वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को भी केंद्र सरकार में एमएसएमई मंत्रालय पहले से ही मिला है। यहां पर दोनों मंत्रियों का एक साथ जिक्र इसलिए किया जा रहा है कि क्योंकि इन दोनों के बीच गुरु-शिष्य जैसा संबंध है। दोनों को एक ही मंत्रालय मिलने की वजह को कुछ संयोग मान रहे हैं तो कुछ अपने तरीके से इसे देख रहे हैं।