विधानसभा चुनाव 2022 में पिछड़ा वोट बैंक का संतुलन बनाने के लिए भाजपा ने जिलेवार पिछड़ा समाज सम्मेलन शुरू किया है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 52 विधानसभा सीटों और पार्टी के 17 जिलों के करीब 36 प्रतिशत पिछड़ी जातियों के मतदाताओं का मन जानने और और उनके बीच पकड़ बनाने की कोशिश नए सिरे से शुरू की गई है।
इस कड़ी की शुरुआत रविवार को कानपुर महानगर जनपद की तीनों जिला इकाइयों उत्तर, दक्षिण और ग्रामीण के तहत आने वाले 10 विधानसभा क्षेत्रों से हुई है। इस तरह का सम्मेलन पूरे क्षेत्र के 17 जनपदों में आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक सम्मेलन में पिछड़ी जाति से जुड़ा पार्टी का कोई बड़ा नेता शामिल होगा।
महानगर के सम्मेलन में कुर्मी, यादव, निषाद, राजपूत, कुशवाहा, प्रजापति, पाल, विश्वकर्मा, सैनी, साहू, सविता, नाई समाज, राठौर बिरादरी के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। किदवई नगर के बसंत उद्यान में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य पिछड़ा आयोग के उपाध्यक्ष प्रभुनाथ ने कहा कि पिछड़ी जातियों को केवल भाजपा में ही सम्मान मिल रहा है।
सरकार और संगठन में पिछड़ा वर्ग को विशेष भागीदारी मिली है। उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी। इसकी अध्यक्षता पिछड़ा वर्ग मोर्चा दक्षिण जिलाध्यक्ष रमाकांत शर्मा और संचालन संजय कटियार द्वारा किया गया। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, महेश त्रिवेदी, मुखलाल पाल, डॉ वीना आर्या पटेल, सुनील बजाज ,संजय कटियार, मनोज राजपूत, अनुभव कटियार, रूपेश कटियार, वीके साहू, विनोद पाल, रमेश वर्मा, पार्षद जितेंद्र सचान, प्रदीप सैनी, सीता पासवान आदि मौजूद रहीं।
पहली बार सम्मेलन में दिखे सिर्फ बिरादरी वाले
भाजपा के पिछड़ा सम्मेलन में पहली बार ऐसा हुआ है जब कार्यक्रम में और मंच पर उसी बिरादरी के लोेगों का बोलबाला रहा। अभी तक सम्मेलन किसी भी बिरादरी का होता था, मंच और कार्यक्रम में कब्जा दूसरे भाजपाइयों का रहता था। यह स्थिति इस वजह से बदली है क्योंकि एक सप्ताह पहले खुफिया माध्यम से पिछड़ों और दलितों की भाजपा में स्थिति की रिपोर्ट मांगी गई थी। उसके बाद यह बदलाव आया।