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बिकरू कांड : इंस्पेक्टर चौबेपुर ने खुद माना नाबालिग को नहीं मिलता है सिम

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कानपुर देहात। फर्जी आईडी से सिम लेने के मामले में नाबालिग पर रिपोर्ट दर्ज कराने वाले चौबेपुर इंस्पेक्टर ने सोमवार को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष बयान दर्ज कराए। इस दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता के सवालों पर कई बार वह उलझे नजर आए।
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इंस्पेक्टर ने खुद स्वीकार किया कि नाबालिग को सिम नहीं मिलता है। वहीं नाबालिग पर जिस सिम को लेकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है वो जिसके नाम है पुलिस ने उसके बयान ही नहीं लिए।
साथ ही पत्रावली में एसआईटी की रिपोर्ट नहीं मिली। इस सवाल पर इंस्पेक्टर ने एक-एक पन्ना पलट कर देखा। मामले में सुनवाई के लिए नाबालिग को बाराबंकी स्थित किशोरी संप्रेक्षण गृह से माती लाया गया था।
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बिकरु कांड में आरोपी नाबालिग पर चौबेपुर इंस्पेक्टर कृष्णमोहन राय ने फर्जी आईडी से सिम लेने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नाबालिग होने की वजह से उसकी सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में चल रही है।
सोमवार को इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय ने बोर्ड के समक्ष फर्जी आईडी से सिम लेने के मामले में बयान दर्ज कराए। बयान के दौरान नाबालिग के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने पत्रावली में एसआईटी रिपोर्ट न होने पर सवाल किया तो इंस्पेक्टर पत्रावली खंगालने लगे।
बाद में उन्होंने माना कि पत्रावली में एसआईटी रिपोर्ट नहीं लगाई गई है। अधिवक्ता ने इंस्पेक्टर से कहा कि नाबालिग की आईडी पर दूर संचार कंपनियां सिम नहीं देती हैं। इस पर इंस्पेक्टर ने भी नाबालिग को सिम न मिलने की बात स्वीकार की।
इंस्पेक्टर ने ये भी माना कि एफआईआर में टीआरएआई (टेेलीकॉम रेग्युलेटरी अथॉर्टी इंडिया) के नियमों का भी पालन नहीं किया गया है। सबसे बड़ी बात ये है कि नाबालिग ने जिस सिम का इस्तेमाल किया था पुलिस ने उसके स्वामी के बयान भी नहीं लिए।
बयान की कार्रवाई शाम तक चलने के बाद भी पूरी नहीं हो सकी। इस पर बोर्ड ने सुनवाई की अगली तिथि 23 सितंबर तय की है। अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने कहा कि अगली तिथि पर इंस्पेक्टर से जिरह पूरी की जाएगी।
गिरफ्तार करने के चार माह बाद दर्ज कराई थी रिपोर्ट
चौबेपुर इंस्पेक्टर कृष्ण मोहन राय ने स्वीकार किया कि उन्होंने जुलाई 2020 में बिकरू कांड के मुख्य अभियोग में नाबालिग को गिरफ्तार किया था। इसके करीब चार माह बाद नाबालिग के खिलाफ फर्जी आईडी से सिम लेने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोपी के नाबालिग होने की बात स्पष्ट होने के बाद भी फर्जी आईडी से सिम खरीदने की एफआईआर दर्ज कराने में पुलिस अपनी ही कार्रवाई में घिरती दिख रही है।
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